साइबर ठगों ने व्यापारी को किया डिजिटल अरेस्ट, दोस्त ने ठगी से बचाया
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2024-12-09 05:50:24

अलवर जिले में साइबर ठगों ने एक नया तरीका अपनाया है, जिसे 'डिजिटल अरेस्ट' कहा जा रहा है। इसमें ठग पीड़ितों को वीडियो कॉल के माध्यम से पुलिस अधिकारी बनकर धमकाते हैं और उन्हें झूठे आरोपों में फंसाने की धमकी देकर पैसे की मांग करते हैं।
व्यापारी राम अवतार गुप्ता का अनुभव
कृषि उपज मंडी के व्यापारी राम अवतार गुप्ता ने बताया कि उनके बेटे यतिन गुप्ता की शादी 24 नवंबर को हुई थी। 5 दिसंबर को वह दिल्ली से कश्मीर घूमने के लिए निकला। शनिवार दोपहर उनके पास अनजान नंबर से व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल आया, जिसमें एक व्यक्ति ने पुलिस की वर्दी पहनी हुई थी। उसने कहा कि उनके बेटे को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे छोड़ने के लिए 3 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करने की मांग की।
दोस्त की सूझबूझ से बचाव
राम अवतार गुप्ता ने पड़ोसी और दोस्त सत्यविजय से पैसे जुटाने की कोशिश की। सत्यविजय ने समझाया कि यह ठगी का मामला हो सकता है और फोन काट दिया। इससे राम अवतार गुप्ता बड़ी ठगी से बच गए।
पुलिस की चेतावनी
अलवर साइबर थाना के सीआई श्रीराम मीना ने बताया कि ऐसे मामलों में ठग खुद को विभिन्न सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और पैसे की मांग करते हैं। उन्होंने जनता से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर तुरंत पुलिस को सूचित करने की अपील की है।
डिजिटल अरेस्ट के अन्य मामले
हाल ही में, अलवर में एक महिला सॉफ्टवेयर इंजीनियर को भी साइबर ठगों ने 'डिजिटल अरेस्ट' कर तीन घंटे तक डराया और मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी संगठनों से जुड़े मामलों में फंसाने की धमकी दी। इस मामले में भी ठगों ने खुद को आरबीआई, ईडी और सीबीआई के अधिकारी बताकर पीड़िता को डराया।
सावधान रहने की आवश्यकता
इन घटनाओं से स्पष्ट है कि साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं। जनता को जागरूक रहकर किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या वीडियो कॉल पर तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए।