दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति यून सुक-योल के मार्शल लॉ विवाद पर विस्तृत रिपोर्ट
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2024-12-08 19:22:02

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक-योल ने मंगलवार, 3 दिसंबर 2024 की रात को देश में मार्शल लॉ लागू करने की घोषणा की। उन्होंने विपक्षी दलों पर संसद को अस्थिर करने, उत्तर कोरिया के साथ सहानुभूति रखने और 'राज्य विरोधी गतिविधियों' में लिप्त होने का आरोप लगाया। इस कदम का उद्देश्य 'राज्य विरोधी ताकतों' के खिलाफ कार्रवाई करना बताया गया।
संसद का विरोध और मार्शल लॉ का शीघ्र
राष्ट्रपति की घोषणा के कुछ घंटों बाद, नेशनल असेंबली ने मतदान कर मार्शल लॉ को निष्क्रिय कर दिया। नेशनल असेंबली के अध्यक्ष वू वोन शिक ने कहा कि सांसद 'लोगों के साथ मिलकर लोकतंत्र की रक्षा करेंगे'।
राष्ट्रपति की माफी और महाभियोग प्रस्ताव
शनिवार, 7 दिसंबर 2024 को, राष्ट्रपति यून ने टेलीविजन पर प्रसारित अपने संबोधन में मार्शल लॉ लागू करने के लिए जनता से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय उनकी 'बेहद हताशा' से प्रेरित था और भविष्य में ऐसा कदम नहीं उठाने का वादा किया। उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य का निर्णय अपनी पार्टी पर छोड़ते हुए कानूनी और राजनीतिक जिम्मेदारी स्वीकार की।
वहीं, सत्तारूढ़ पार्टी के नेता हान डोंग-हुन ने राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग की, यह कहते हुए कि वह अब सार्वजनिक कर्तव्यों का पालन करने की स्थिति में नहीं हैं। विपक्षी दलों ने महाभियोग प्रस्ताव पेश किया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि उन्हें आवश्यक दो-तिहाई बहुमत मिलेगा या नहीं।
रक्षा मंत्री का इस्तीफा और महाभियोग प्रस्ताव
मार्शल लॉ की घोषणा के बाद, रक्षा मंत्री किम योंग-ह्यून ने इस्तीफा दे दिया। उन पर मार्शल लॉ लागू करने का आग्रह करने का संदेह था। संसद ने चार अधिकारियों पर महाभियोग लगाया, जबकि राष्ट्रपति यून सुक-योल के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर मतदान होना बाकी था।
जनता का विरोध और प्रदर्शन
मार्शल लॉ की घोषणा के बाद, देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए। हजारों लोग संसद के बाहर इकट्ठा होकर राष्ट्रपति के महाभियोग की मांग कर रहे थे। यह स्थिति 2016 में तत्कालीन राष्ट्रपति पार्क ग्यून-हे के महाभियोग की याद दिलाती है, जिसके बाद उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था।
राष्ट्रपति यून सुक-योल का मार्शल लॉ लागू करने का निर्णय देश में राजनीतिक उथल-पुथल का कारण बना। उनकी माफी और महाभियोग प्रस्ताव के बावजूद, देश की राजनीति में अस्थिरता बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस विवाद का समाधान और देश की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की स्थिरता पर निर्भर करेगा।