GST फर्जी क्रेडिट का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के ईसीएल को ब्लॉक कर सकती है सरकार -मद्रास हाई कोर्ट


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2024-12-08 17:45:45



 

कभी आपने सोचा है कि व्यापारियों के द्वारा गलत तरीके से क्रेडिट का लाभ उठाने पर सरकार की कार्रवाई क्या होती है? हाल ही में, मद्रास हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि अगर कोई कंपनी GST के तहत गलत तरीके से क्रेडिट का लाभ उठाती है, तो उसके इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर (ECL) को ब्लॉक किया जा सकता है, चाहे उस समय लेजर में कोई बैलेंस न हो। यह फैसला व्यापारियों और सरकार दोनों के लिए एक बड़ा संकेत है कि GST अनुपालन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मद्रास हाई कोर्ट का फैसला:

मद्रास हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि यदि कोई कंपनी गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ उठा रही है, तो संबंधित अधिकारियों को उसका ईसीएल ब्लॉक करने का अधिकार है, चाहे वह क्रेडिट पहले ही उपयोग कर लिया गया हो। न्यायमूर्ति कृष्णन रामासामी ने यह कहा कि अगर गलत तरीके से availed ITC (input tax credit) का उपयोग कर लिया गया हो, तो अधिकारियों को इस क्रेडिट के अनुपात में ईसीएल को ब्लॉक करने का अधिकार है।

GST नियम 86A का महत्व:

न्यायालय ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि GST नियम 86A के तहत, अधिकारियों को तब तक क्रेडिट को ब्लॉक करने का अधिकार है, जब तक वह गलत तरीके से प्राप्त क्रेडिट का उपयोग न हो जाए। अगर क्रेडिट का उपयोग पहले ही हो चुका है, तो भी अधिकारियों को उस क्रेडिट की मात्रा के हिसाब से ईसीएल को ब्लॉक करने का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि हमेशा यह संभव नहीं होता कि जब अधिकारी गलत क्रेडिट के बारे में जानें, तो वह क्रेडिट पहले ही उपयोग हो चुका हो।

स्कंथगुरु इनोवेशन का मामला:

यह मामला चेन्नई स्थित कंपनी स्कंथगुरु इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड का था, जिसने इस निर्णय को चुनौती दी थी। कंपनी ने 26 सितंबर 2023 को जारी किए गए 'GST ASMT 10' नोटिस का विरोध किया था, जिसमें कहा गया था कि उसकी ईसीएल को ब्लॉक किया गया है। कंपनी का तर्क था कि जब इस आदेश को पारित किया गया, तब उसके ईसीएल में कोई बैलेंस नहीं था। लेकिन मद्रास हाई कोर्ट ने कंपनी का यह तर्क खारिज कर दिया, और कहा कि नियम 86A का उद्देश्य किसी भी प्रकार की गलत क्रेडिट के उपयोग को रोकना है, और इसलिए इसका प्रभाव उस स्थिति में भी लागू होगा, जब ईसीएल में बैलेंस नहीं हो।

गुजरात और दिल्ली हाई कोर्ट के फैसलों से भिन्नता:

कंपनी ने गुजरात और दिल्ली हाई कोर्ट के कुछ फैसलों का हवाला देते हुए यह दावा किया कि यदि ईसीएल में कोई बैलेंस नहीं है, तो क्रेडिट को ब्लॉक नहीं किया जा सकता। लेकिन मद्रास हाई कोर्ट ने इन फैसलों को खारिज करते हुए कहा कि इन दोनों अदालतों ने नियम 86A की संपूर्ण व्याख्या नहीं की थी। कोर्ट ने कहा कि यदि इस नियम को पूरी तरह से पढ़ा जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि फर्जी क्रेडिट की मात्रा के अनुसार ईसीएल को ब्लॉक किया जा सकता है, भले ही लेजर में उस समय कोई बैलेंस न हो।

कंपनी का तर्क और अदालत की प्रतिक्रिया:

कंपनी के वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश पारासरण ने तर्क किया कि ईसीएल ब्लॉक करना नियम 86A के विपरीत है, क्योंकि जब कोई क्रेडिट शेष नहीं होता, तो इसे ब्लॉक कैसे किया जा सकता है। लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि नियामक अधिकारियों को गलत क्रेडिट के प्रयोग की जांच करने का पूरा अधिकार है, और यदि उस क्रेडिट का उपयोग हो चुका है, तो भी उस पर कार्रवाई की जा सकती है।

केंद्र और राज्य अधिकारियों के बीच अंतर:

कंपनी ने यह भी आरोप लगाया कि उसे राज्य और केंद्र दोनों अधिकारियों द्वारा समान मामले में कार्रवाई का सामना करना पड़ा। लेकिन अदालत ने यह स्पष्ट किया कि राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर अलग-अलग समय अवधियों के आधार पर जांच की जा रही थी, और इसलिए दोनों मामलों में अंतर था। अदालत ने राज्य स्तर की कार्यवाही को जारी रखने की अनुमति दी।

मद्रास हाई कोर्ट का यह निर्णय व्यापारियों और सरकार के लिए एक चेतावनी है कि GST के नियमों का उल्लंघन करना गंभीर परिणामों की ओर ले जा सकता है। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि अधिकारियों को गलत क्रेडिट का पता चलने पर सख्त कार्रवाई करने का अधिकार है, और यदि कोई कंपनी इसे गलत तरीके से इस्तेमाल करती है, तो उसका ईसीएल ब्लॉक किया जा सकता है। इस फैसले से यह संदेश मिलता है कि GST के अनुपालन में कोई भी गड़बड़ी नहीं सहन की जाएगी।


global news ADglobal news AD