कश्मीर में मारखोर की दुर्लभ उपस्थिति: संरक्षण की नई दिशा
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2024-12-08 15:41:59

कश्मीर के काज़िनाग नेशनल पार्क के नूर्खा जलप्रपात के निकट हाल ही में मारखोर, एक संकटग्रस्त जंगली बकरी की प्रजाति, की उपस्थिति दर्ज की गई है। यह घटना कश्मीर में मारखोर की संख्या में वृद्धि और संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रतीक है।
मारखोर का महत्व:
मारखोर (Capra falconeri) विश्व की सबसे बड़ी जंगली बकरी है, जिसकी सींगें 1.6 मीटर तक लंबी हो सकती हैं। यह प्रजाति भारत में जम्मू और कश्मीर के सीमित क्षेत्रों में पाई जाती है और IUCN रेड लिस्ट में 'नियर थ्रेटेड' श्रेणी में शामिल है।
संरक्षण प्रयास:
मारखोर के संरक्षण के लिए वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) और जम्मू-कश्मीर वन्यजीव संरक्षण विभाग ने 2009 में 'मारखोर रिकवरी प्रोजेक्ट' शुरू किया। इस परियोजना के तहत स्थानीय समुदायों, चरवाहों और भारतीय सेना के साथ मिलकर मारखोर के आवासों की रक्षा, शिकार पर नियंत्रण और जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए हैं।
नूर्खा जलप्रपात में उपस्थिति:
नूर्खा जलप्रपात काज़िनाग नेशनल पार्क के भीतर स्थित है, जो मारखोर के लिए महत्वपूर्ण आवास प्रदान करता है। यह क्षेत्र उच्च हिमालयी घास के मैदानों और शंकुधारी जंगलों से घिरा है, जो मारखोर के लिए उपयुक्त हैं।
भविष्य की दिशा:
मारखोर की उपस्थिति कश्मीर में जैव विविधता के संरक्षण में सकारात्मक संकेत है। हालांकि, चरवाहों के पशुधन, शिकार और आवासों के नुकसान जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी, सख्त कानून प्रवर्तन और सतत संरक्षण प्रयासों से मारखोर की संख्या में और वृद्धि संभव है।
नूर्खा जलप्रपात के निकट मारखोर की उपस्थिति कश्मीर में संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रतीक है। स्थानीय समुदायों, वन्यजीव विभाग और संरक्षण संगठनों के संयुक्त प्रयासों से इस प्रजाति का भविष्य उज्जवल हो सकता है।