ISRO ने यूरोपीय स्पेस एजेंसी के प्रोबा-3 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2024-12-08 08:26:45

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 5 दिसंबर 2024 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के प्रोबा-3 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह मिशन सूर्य के कोरोना का अध्ययन करने के लिए दो उपग्रहों को एक साथ भेजने वाला पहला मिशन है।
प्रोबा-3 मिशन का उद्देश्य
प्रोबा-3 मिशन का मुख्य उद्देश्य सूर्य के बाहरी वातावरण, जिसे कोरोना कहा जाता है, का विस्तृत अध्ययन करना है। सूर्य के कोरोना का तापमान सूर्य की सतह से कहीं अधिक होता है, और इसका अध्ययन करना चुनौतीपूर्ण है। प्रोबा-3 मिशन के माध्यम से वैज्ञानिक सूर्य के कोरोना के तापमान, संरचना और उसके साथ होने वाली घटनाओं को समझने का प्रयास करेंगे।
उपग्रहों की संरचना और कार्यप्रणाली
प्रोबा-3 मिशन में दो उपग्रह शामिल हैं: कोरोनाग्राफ स्पेसक्राफ्ट (CSC) और ऑक्लटर स्पेसक्राफ्ट (OSC)। दोनों उपग्रह एक साथ उड़ान भरते हुए सूर्य के सामने एक कृत्रिम सूर्यग्रहण बनाएंगे, जिससे कोरोनाग्राफ स्पेसक्राफ्ट सूर्य के कोरोना का अध्ययन कर सकेगा। यह तकनीक सूर्य के कोरोना के अध्ययन में नई दिशा प्रदान करेगी।
ISRO की भूमिका और महत्व
इस मिशन में ISRO की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह यूरोपीय स्पेस एजेंसी के साथ सहयोग में भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को प्रदर्शित करता है। ISRO ने PSLV-XL रॉकेट के माध्यम से प्रोबा-3 मिशन को लॉन्च किया, जो भारत की विश्वसनीयता और तकनीकी दक्षता को दर्शाता है।
वैज्ञानिक समुदाय की प्रतिक्रिया
वैज्ञानिक समुदाय ने प्रोबा-3 मिशन को अत्यंत महत्वपूर्ण माना है, क्योंकि यह सूर्य के कोरोना के अध्ययन में नई जानकारी प्रदान करेगा। इससे सूर्य के व्यवहार को समझने में मदद मिलेगी, जो पृथ्वी पर जीवन के लिए महत्वपूर्ण है।
भविष्य की संभावनाएं
प्रोबा-3 मिशन के सफलतापूर्वक लॉन्च होने से भविष्य में सूर्य के अध्ययन के लिए और अधिक मिशनों की संभावना बढ़ गई है। यह मिशन अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की अग्रणी भूमिका को मजबूत करेगा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देगा।