(खबर न्यायालय से )मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का अनूठा कदम: वकील को सामाजिक ऑडिट के लिए अनाथालय में सेवा का निर्देश
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2024-12-08 07:02:01

हाल ही में, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने एक अनूठा आदेश पारित किया है, जिसमें एक वकील को 'सामाजिक ऑडिट' के उद्देश्य से अनाथालय में सेवा करने का निर्देश दिया गया है। यह कदम समाज में सामाजिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मामले का सारांश:
यह मामला एक याचिका से संबंधित था, जिसे पहले वकील की लापरवाही के कारण खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने याचिका की बहाली की मांग की थी, और वकील ने अपनी गलती को स्वीकार करते हुए याचिका की बहाली का अनुरोध किया। न्यायालय ने याचिका की बहाली की अनुमति दी, लेकिन वकील को सामाजिक ऑडिट के उद्देश्य से अनाथालय में एक घंटे की सेवा करने का निर्देश दिया।
न्यायालय का निर्देश:
न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार वानी की खंडपीठ ने वकील को ग्वालियर के माधव अंधाश्रम में एक घंटे की सेवा करने का निर्देश दिया। इस दौरान वकील को बच्चों और परिवारों के साथ समय बिताने, भोजन सामग्री लाने और उनकी स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए कहा गया। न्यायालय ने इसे दंडात्मक नहीं, बल्कि जागरूकता बढ़ाने का कदम बताया।
सामाजिक ऑडिट का महत्व:
न्यायालय ने सामाजिक ऑडिट की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें समाज के जिम्मेदार व्यक्ति जैसे वकील, डॉक्टर, और अन्य पेशेवर संस्थानों का दौरा करके वहां की स्थिति का मूल्यांकन करें। इससे संस्थानों के प्रबंधन पर समाज की नजर बनी रहती है, और वे अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। न्यायालय ने महिला एवं बाल विकास विभाग, सामाजिक न्याय विभाग और पुलिस विभाग से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की अपेक्षा की है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का यह कदम समाज में सामाजिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण है। 'सामाजिक ऑडिट' के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों की स्थिति का मूल्यांकन करना और सुधार के उपाय सुझाना आवश्यक है। न्यायालय के इस निर्देश से यह स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रही है।