किसान आंदोलन: शंभू बॉर्डर पर दिल्ली चलो मार्च में तनाव और प्रशासनिक कार्रवाई 


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2024-12-07 06:44:40



 

पंजाब-हरियाणा सीमा पर स्थित शंभू बॉर्डर पर किसानों का 'दिल्ली चलो' मार्च आज (6 दिसंबर 2024) आरंभ हुआ। किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड्स को तोड़ने का प्रयास किया, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान कई किसान घायल हुए हैं। 

प्रशासनिक तैयारी और सुरक्षा उपाय

प्रदर्शनकारियों के दिल्ली कूच को रोकने के लिए प्रशासन ने शंभू बॉर्डर पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है। पुलिस बल तैनात हैं और बैरिकेड्स लगाए गए हैं। साथ ही, इंटरनेट सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। 

किसानों की मांगें और आंदोलन का उद्देश्य

किसान संगठनों की मुख्य मांगें MSP की कानूनी गारंटी, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों का पालन, और कृषि ऋण माफी हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है, जिससे आंदोलन की आवश्यकता पड़ी है। 

प्रदर्शनकारियों का आक्रोश और प्रशासन की प्रतिक्रिया

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और बैरिकेड्स लगाए, जिससे उनकी आवाज़ दबाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस ने कहा है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ये कदम उठाए गए हैं। 

आंदोलन का भविष्य और संभावित परिणाम

किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है। 

शंभू बॉर्डर पर चल रहा किसान आंदोलन सरकार और किसानों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है। दोनों पक्षों के बीच संवाद और समझौते की आवश्यकता है ताकि शांति और समृद्धि सुनिश्चित की जा सके।


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