मणिपुर हिंसा में 10 कूकी जो युवाओं की हत्या के बाद उठ रहे बड़े सवाल
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2024-12-06 19:17:10

मणिपुर के जिरिबाम में 11 नवंबर को हुई हिंसा में सीआरपीएफ द्वारा मारे गए 10 कूकी जो युवा अब कड़ी जांच की मांग कर रहे हैं। इन युवाओं की हत्या ने मणिपुर के कूकी जो समुदाय में गुस्से और आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। इस घटना के बाद, सैकड़ों लोग लमका में आयोजित शोकसभा में शामिल हुए और इन शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस शोक सभा के दौरान शहीदों के परिवारों ने उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर अपनी भावनाओं का इज़हार किया। क्या यह हत्या सुनियोजित थी या कोई और कारण था? आइए जानते हैं पूरी जानकारी।
हत्या की घटना: CRPF द्वारा की गई फायरिंग पर उठे गंभीर सवाल
जिरिबाम में 11 नवंबर को हुए एक मुठभेड़ के दौरान, सीआरपीएफ जवानों द्वारा 10 कूकी जो युवाओं को गोली मार दी गई। इन युवाओं की मौत के बाद पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट्स में यह खुलासा हुआ कि उन्हें पीठ से गोली मारी गई थी, जो यह दर्शाता है कि ये युवक सुरक्षा बलों के साथ किसी मुठभेड़ में नहीं थे। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि इन युवाओं को कई गोलियां मारी गई थीं, और कुछ के शरीर से आंखें भी निकाल ली गई थीं। इस तरह की घटना ने सीआरपीएफ की नैतिकता और व्यवहार पर सवाल उठाए हैं।
लमका में शोकसभा: कूकी जो समुदाय का भारी विरोध
गुरुवार को लमका स्थित पीस ग्राउंड में एक शोकसभा का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। यहां कूकी जो समुदाय के नेताओं ने उन 12 नागरिकों की श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनकी हाल ही में हुई हिंसा में मौत हो गई थी। इनमें 10 युवा शामिल थे, जो सीआरपीएफ की गोलीबारी में मारे गए थे। शहीदों की शव यात्रा को शोक सभा में लाया गया, और सभी नेता परंपरागत शॉल से उनके पार्थिव शरीर को ढककर श्रद्धांजलि अर्पित की।
मिजोरम से प्रतिनिधिमंडल: शहीदों को दी श्रद्धांजलि
मिजोरम से एक प्रतिनिधिमंडल, जिसमें यंग मिजो एसोसिएशन (CYMA) के नेता और मिजोरम के मुख्यमंत्री के सलाहकार, पु गिंजलाल हौज़ल शामिल थे, इस शोकसभा में पहुंचे। इस दौरान, उन्होंने शहीदों के शवों पर पारंपरिक शॉल चढ़ाकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। यह दृश्य समुदाय के बीच एकता और समर्थन की भावना को दर्शाता है।
इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (ITLF) की ओर से न्याय की मांग
इस बीच, इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (ITLF) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक ज्ञापन भेजा, जिसमें मणिपुर में कूकी जो युवाओं की हत्या की न्यायिक जांच की मांग की गई है। फोरम ने इस घटना को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं और कहा है कि मणिपुर में कूकी जो समुदाय के खिलाफ हिंसा में कोई कमी नहीं आई है। ITLF का कहना है कि इस समुदाय के खिलाफ लगातार हमले हो रहे हैं, और अब सीआरपीएफ द्वारा की गई यह गोलीबारी इन हमलों का हिस्सा प्रतीत होती है।
मणिपुर में जातीय हिंसा: कूकी जो समुदाय की दयनीय स्थिति
मणिपुर में पिछले 19 महीनों से जारी जातीय हिंसा ने कूकी जो समुदाय को बहुत बड़ी मुश्किल में डाल दिया है। ITLF का कहना है कि राज्य सरकार मणिपुरी जातीय समूह के पक्ष में खड़ी है और कूकी जो समुदाय के खिलाफ लगातार हमले किए जा रहे हैं। इन हमलों में कूकी जो नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है, और अब तक इन हमलों में सैकड़ों की संख्या में लोग मारे जा चुके हैं।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट्स और शवों की शारीरिक स्थिति: हत्याओं का क्या कारण था?
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट्स में यह साफ हुआ है कि इन युवाओं को गोलियों से मारा गया था, और कुछ शवों की स्थिति बहुत ही खौ़फनाक थी। शवों से आंखें निकाली गई थीं, जिससे हत्या के पीछे कोई और ही मंशा दिखाई देती है। यह घटना न केवल कूकी जो समुदाय के लिए दर्दनाक है, बल्कि इसने पूरे राज्य की स्थिति को और भी जटिल बना दिया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या सीआरपीएफ की कार्रवाई पूरी तरह से वैध थी?
न्याय की ओर पहला कदम: ITLF की मांग
ITLF ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मांग की है कि इस मामले की न्यायिक जांच की जाए ताकि दोषियों को सजा मिल सके। साथ ही, उन्होंने कूकी जो समुदाय के लिए एक अलग प्रशासन की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि उनके अधिकारों की रक्षा की जा सके और वे भेदभाव और उत्पीड़न से मुक्त जीवन जी सकें।
समाज में बढ़ती असहमति और तनाव
इस घटना के बाद मणिपुर में स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है। कूकी जो समुदाय और मणिपुर की राज्य सरकार के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच चुका है। यह केवल कूकी जो समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरे मणिपुर के लिए एक गंभीर समस्या बन चुका है। क्या राज्य सरकार इस समस्या का समाधान निकालेगी? या फिर यह हिंसा और असहमति का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?
क्या मिलेगा कूकी जो समुदाय को न्याय?
इस घटना ने मणिपुर की राजनीति और समाज में गहरी खाई बना दी है। कूकी जो समुदाय को अब तक उचित न्याय नहीं मिला है, और ITLF की मांग यह दर्शाती है कि सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर कदम उठाने चाहिए। क्या कूकी जो समुदाय को उनकी न्याय की तलाश में सफलता मिलेगी? आने वाले समय में यह सवाल अहम बनता है।