भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी: हिंद महासागर में शक्ति संतुलन में परिवर्तन


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2024-12-06 08:40:38



 

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है, जिसके तहत भारत 2025 तक फ्रांस से 26 राफेल-एम लड़ाकू विमानों और तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों का अधिग्रहण करेगा। यह समझौता भारत की नौसैनिक क्षमताओं को सुदृढ़ करने और हिंद महासागर क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

राफेल-एम लड़ाकू विमानों का महत्व

राफेल-एम लड़ाकू विमान, जो 4.5 पीढ़ी के मल्टी-रोल विमान हैं, भारतीय नौसेना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन विमानों की तैनाती स्वदेश निर्मित विमानवाहक पोत INS विक्रांत पर की जाएगी, जिससे भारत की समुद्री शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। रिटायर्ड मेजर जनरल ध्रुव कटोच के अनुसार, यह विकास भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा में सक्षम बनाएगा। 

स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का योगदान

स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियां अपनी स्टील्थ और उन्नत तकनीक के लिए प्रसिद्ध हैं। इन तीन अतिरिक्त पनडुब्बियों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की पनडुब्बी क्षमता में वृद्धि होगी, जो क्षेत्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ये पनडुब्बियां मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा फ्रांसीसी फर्म नेवल ग्रुप के सहयोग से बनाई जाएंगी, जिसमें 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होगी। 

चीन-पाकिस्तान नौसैनिक गठजोड़ पर भारत की प्रतिक्रिया

भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने पाकिस्तान की नौसेना की तेजी से बढ़ती ताकत पर चिंता जताई है, विशेषकर चीन के सहयोग से। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की नौसेना के कई युद्धपोत और पनडुब्बियां चीन की मदद से बनाई जा रही हैं, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। 

भारत की तैयारी और रणनीति

इन चुनौतियों के मद्देनजर, भारत अपनी नौसैनिक क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है। अगले दशक में भारतीय नौसेना 96 जहाजों और पनडुब्बियों के अधिग्रहण की योजना बना रही है, जिसमें दो उन्नत परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बियों (SSN) का विकास शामिल है। नौसेना प्रमुख के अनुसार, पहला SSN 2036-37 तक पूरा होने वाला है, उसके बाद दूसरा 2038-39 में पूरा होगा। 

क्षेत्रीय सुरक्षा में भारत की भूमिका

भारत की नौसैनिक रणनीति समुद्री मार्गों की सुरक्षा, महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट्स की रक्षा और विरोधी देशों से खतरों का मुकाबला करने पर केंद्रित है। नौसैनिक सिद्धांत शक्ति प्रक्षेपण, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक निरोध पर जोर देता है। भारत का ध्यान हिंद महासागर पर केंद्रित है, क्योंकि यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है। 

भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी और पाकिस्तान की नौसैनिक क्षमताओं में वृद्धि के संदर्भ में, भारत अपनी नौसैनिक ताकत को सुदृढ़ करने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है। राफेल-एम विमानों और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के अधिग्रहण से भारत की समुद्री शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जो क्षेत्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


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