सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय: आयातित कार के बाद के खरीदार को कस्टम ड्यूटी का भुगतान नहीं करना होगा
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2024-12-06 07:29:40

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि आयातित कार के बाद में खरीदार को कस्टम ड्यूटी का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। यह निर्णय आयातकों और उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कस्टम एक्ट की व्याख्या में स्पष्टता आई है।
मामले का विवरण
केरल उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील करते हुए, एक व्यक्ति ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। केरल उच्च न्यायालय ने कस्टम विभाग के पक्ष में निर्णय दिया था, जिसमें बाद के खरीदार को आयातित कार पर कस्टम ड्यूटी का भुगतान करने का आदेश दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने इस आदेश को पलटते हुए कहा कि बाद में खरीदार को आयातक के रूप में नहीं माना जा सकता है।
कानूनी व्याख्या
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कहा कि कस्टम एक्ट की धारा 125(1) के अनुसार, कार के स्वामी को ही दायित्वित किया जा सकता है, जब माल के स्वामी का पता न हो। चूंकि कार का स्वामी आयातक था, इसलिए बाद में खरीदार को कस्टम ड्यूटी का भुगतान करने का आदेश नहीं दिया जा सकता है।
पक्षकारों की भूमिका
याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट शशिभूषण पी. आदगांवकर ने तर्क प्रस्तुत किया कि वह केवल बाद में खरीदार हैं और आयातक नहीं हैं, इसलिए उन पर कस्टम ड्यूटी का दायित्व नहीं बनता है। वहीं, प्रतिवादी की ओर से सीनियर एडवोकेट रूपेश कुमार ने तर्क दिया कि कार जब याचिकाकर्ता के पास थी, तब वह स्वामी थे, इसलिए उन पर कस्टम ड्यूटी का दायित्व बनता है।
न्यायालय का निर्णय
न्यायालय ने प्रतिवादी के तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता केवल बाद में खरीदार हैं और आयातक नहीं हैं। इसलिए, उन पर कस्टम ड्यूटी का दायित्व नहीं बनता है। न्यायालय ने केरल उच्च न्यायालय के आदेश को पलटते हुए याचिका स्वीकार की और कस्टम ड्यूटी के भुगतान के आदेश को रद्द किया।
महत्वपूर्ण निष्कर्ष
यह निर्णय उपभोक्ताओं और आयातकों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे स्पष्ट होता है कि बाद में खरीदारों को कस्टम ड्यूटी का भुगतान करने का दायित्व नहीं है। यह निर्णय कस्टम एक्ट की व्याख्या में स्पष्टता प्रदान करता है और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करता है।