राजस्थान उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण आदेश: टैटू के कारण अयोग्य घोषित अभ्यर्थी को चयन प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2024-12-06 05:14:55

राजस्थान उच्च न्यायालय ने केंद्रीय पुलिस बल की कांस्टेबल भर्ती में दाएं हाथ की कलाई पर टैटू के कारण अयोग्य घोषित किए गए अभ्यर्थी को राहत प्रदान की है। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता को अंतरिम रूप से चयन प्रक्रिया में शामिल करे और भर्ती का परिणाम सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे। साथ ही, अदालत ने एक पद याचिकाकर्ता के लिए खाली रखने का आदेश दिया है।
मामले का विवरण: याचिकाकर्ता की अयोग्यता और याचिका
याचिकाकर्ता दिलखुश बैरवा ने 24 नवंबर, 2023 को केंद्रीय पुलिस बल में कांस्टेबल भर्ती के लिए आवेदन किया था। वह एससी वर्ग में सफल हुए और 29 अक्टूबर, 2023 को बीकानेर में दस्तावेज सत्यापन भी करवा चुके थे। हालांकि, विस्तृत चिकित्सीय परीक्षण में उनके दाएं हाथ की कलाई पर टैटू पाया गया, जिसके कारण उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने अदालत में यह तर्क प्रस्तुत किया कि सामाजिक प्रथा के चलते बचपन में उनके दाएं हाथ पर यह टैटू बनाया गया था, जिसे अब सर्जरी के माध्यम से हटा दिया गया है।
अदालत का आदेश: अंतरिम राहत और चयन प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश
अदालत ने याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह उन्हें चयन प्रक्रिया में शामिल करे। साथ ही, भर्ती का परिणाम सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया। अदालत ने एक पद याचिकाकर्ता के लिए खाली रखने का भी निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस अंतरिम आदेश से याचिकाकर्ता के कोई स्थायी अधिकार सृजित नहीं होंगे।
टैटू के संबंध में न्यायालय के पूर्व आदेश
इससे पहले, दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा था कि सैन्य या पुलिस बल में भर्ती होने की सभी योग्यताएं रखने वाले युवक की उम्मीदवारी महज इसलिए खारिज नहीं की जा सकती कि उसके शरीर के किसी हिस्से पर टैटू बना है। उम्मीदवार को टैटू हटवाने का अवसर देना अनिवार्य है। यदि उम्मीदवार टैटू हटवा लेता है, तो उसकी नियुक्ति पर विचार किया जा सकता है।
भर्ती प्रक्रिया में लचीलापन और न्यायिक दृष्टिकोण
इस मामले में न्यायालय ने भर्ती प्रक्रिया में लचीलापन दिखाते हुए याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत प्रदान की है। यह आदेश दर्शाता है कि भर्ती प्रक्रियाओं में मानवीय दृष्टिकोण और न्यायिक विवेक का समावेश आवश्यक है, ताकि योग्य उम्मीदवारों के अवसर सुनिश्चित किए जा सकें।