(एक बार पढ़ लो यह खबर )नशा मुक्त भारत अभियान: आचार्य डॉक्टर गोपाल गोयल और C.O. अरुण सिंह भाटी ने नशे के खिलाफ छेड़ी नई मुहिम
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2024-12-04 21:37:27

नशा मुक्त भारत अभियान के तहत एक प्रभावशाली जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया जिसमें सीमा गृह सुरक्षा के जवानों और C.O. अरुण सिंह भाटी ने आचार्य डॉक्टर गोपाल गोयल और रेजिडेंट डॉक्टर तुलसी शर्मा के साथ मिलकर नशे की लत और उसके दुष्प्रभावों पर चर्चा की। इस सत्र का उद्देश्य नशे से मुक्त समाज का निर्माण करना और इसके दुष्प्रभावों से लोगों को सचेत करना था।
नशे के प्रकार और उनकी श्रेणियां
इस अभियान में विभिन्न प्रकार के नशे और उनकी श्रेणियों पर चर्चा की गई।
* ओपिओइड कैटेगरी: इसमें शराब, अमल, डोडा, पोस्त, हीरोइन, स्मैक, चिट्टा, ट्रामाडोल, और ट्रपेंटाडॉल जैसे नशीले पदार्थ शामिल हैं।
* कैनाबिस कैटेगरी: गांजा, भांग, और ज्वाइंट।
* अन्य नशीले पदार्थ: MDMA, नींद की गोलियां, और दर्द निवारक दवाइयों का गलत उपयोग।
इन नशीले पदार्थों के बढ़ते प्रचलन से समाज में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
शारीरिक और मानसिक दुष्प्रभावों की गंभीरता
डॉक्टरों ने नशे के शारीरिक और मानसिक दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया:
शारीरिक दुष्प्रभाव:
* लीवर, फेफड़ों और मुंह का कैंसर।
* डोडा-पोस्त के सेवन से आंतों के चिपकने की समस्या।
* कब्ज और पेट दर्द, जिसके लिए सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।
मानसिक दुष्प्रभाव:
* चिड़चिड़ापन, गुस्सा, और घबराहट।
* नशे की लत से उत्पन्न अवसाद और अन्य मानसिक बीमारियां।
सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर प्रभाव
नशे का प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसका असर उनके परिवार और समाज पर भी पड़ता है।
परिवारजनों और मित्रों के साथ संबंध खराब होना।
* आर्थिक तंगी और सामाजिक अलगाव।
* नशे की लत के लिए अपराध में शामिल होना।
शिक्षा पर प्रभाव
नशा करने वाले छात्र स्कूल जाने से कतराते हैं। पढ़ाई में गिरावट, चिड़चिड़ापन और असामान्य व्यवहार के साथ स्कूल से शिकायतें बढ़ने लगती हैं।
नशा मुक्ति के उपाय और परामर्श
डॉक्टरों ने बताया कि नशा मुक्ति के लिए मरीजों की स्थिति के आधार पर दवा और परामर्श दिया जाता है।
मरीज और परिवार को दवाओं के उपयोग की जानकारी दी जाती है।
गंभीर मामलों में मरीजों को भर्ती कर काउंसलिंग और उचित देखभाल दी जाती है।
डॉक्टर की सलाह के बिना किसी भी दवा का उपयोग नहीं करना चाहिए।
समाज में जागरूकता फैलाने की अपील
अभियान के दौरान उपस्थित जवानों और डॉक्टरों ने समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए जनसहभागिता की आवश्यकता पर जोर दिया। यह पहल न केवल नशे के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करेगी बल्कि नए भारत के निर्माण में भी मदद करेगी।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। नशीले पदार्थों के उपयोग और दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी चिकित्सा विशेषज्ञों की राय पर आधारित है।