गंगाशहर में काव्य के रंग: होटल मरुधर हेरिटेज में आयोजित साप्ताहिक काव्य गोष्ठी ने बिखेरा साहित्य का जादू
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2024-12-02 17:01:36

गंगाशहर रोड स्थित होटल मरुधर हेरिटेज में 1 दिसंबर, रविवार को पर्यटन लेखक संघ-महफिले अदब के सौजन्य से साप्ताहिक काव्य गोष्ठी आयोजित हुई। यह आयोजन हिंदी, उर्दू और राजस्थानी साहित्य के रसिकों के लिए एक अद्भुत अनुभव था। कार्यक्रम में स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के कवियों ने अपनी रचनाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मुख्य अतिथि और अध्यक्षीय संबोधन
काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि शायर इमदाद उल्लाह बासित थे, जबकि अध्यक्षता प्रख्यात लेखक और पूर्व प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी ने की। गोष्ठी का संचालन वरिष्ठ शायर और उद्घोषक असद अली असद ने किया।
डॉ. बिनानी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में काव्य रचना को साहित्य की प्रमुख विधाओं में से एक बताया। उन्होंने कहा, "काव्य रचना शब्द रूपी पुष्पों का गुलदस्ता है, जिसमें रचनाकार अपनी संवेदनाओं को पंखुड़ियों के रूप में शब्दों के जरिए प्रस्तुत करता है।"
अद्भुत काव्य प्रस्तुतियां
गोष्ठी में शायर इमदाद उल्लाह बासित ने अपनी रचना - "हमें अदु ने नहीं राहबर ने लूटा है, हमारा ज़ादे सफर हमसफर ने लूटा है।" प्रस्तुत कर दर्शकों की भरपूर तालियां बटोरीं।
प्रोफेसर डॉ. बिनानी ने जीवन की चार अवस्थाओं पर आधारित अपनी कविता "जिंदगी का सफरनामा यूं ही चलता रहेगा" सुनाई, जिसने सभी को भावुक कर दिया।
वरिष्ठ कवियों का जोशीला अंदाज
वरिष्ठ कवि डॉ. जगदीश दान बारहठ ने "सोच का कुछ दायरा बड़ा कीजिए" शीर्षक से जोशीले अंदाज में कविता प्रस्तुत की।
शायर असद अली असद ने आम आदमी के जज्बातों को अपनी गजल "शाम तक जैसे धूप ढलती है" के माध्यम से व्यक्त किया और खूब प्रशंसा पाई।
शायर अमर जुनूनी ने अपनी गजल "जब बारिश शबनम बनके गिरि, तुम याद आए" तरन्नुम में प्रस्तुत कर माहौल को जीवंत बना दिया।
नई रचनाओं का आकर्षण
कवि धर्मेंद्र राठौड़ ‘धनंजय’ ने "एक दिन जमाने से चले जाएंगे" शीर्षक से अपनी भावपूर्ण रचना प्रस्तुत कर गोष्ठी को एक नई ऊंचाई दी।
अतिथियों का स्वागत और धन्यवाद ज्ञापन
अमर जुनूनी ने आगंतुकों का स्वागत किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जगदीश दान बारहठ ने किया।
संयोजन और संचालन
गोष्ठी का संयोजन और संचालन असद अली असद ने किया, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम को बेहद व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से संपन्न किया।
गंगाशहर में आयोजित इस काव्य गोष्ठी ने साहित्य प्रेमियों को एकजुट किया और भाषा, संस्कृति और साहित्य की सुंदरता को जीवंत कर दिया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि साहित्यिक गतिविधियां समाज को जोड़ने और संवेदनशील बनाने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।