सिरमौर, हिमाचल प्रदेश: गिरिपार क्षेत्र में बूढ़ी दिवाली की धूम


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2024-12-02 16:46:02



सिरमौर, हिमाचल प्रदेश: गिरिपार क्षेत्र में बूढ़ी दिवाली की धूम

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र में बुढ़ी दिवाली का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह सात दिवसीय उत्सव 4 बजे सुबह से आरंभ होने वाली मशाल जुलूस के साथ शुरू होता है, जो क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।

पारंपरिक संगीत, नृत्य और प्रार्थनाएं

इस उत्सव में पारंपरिक संगीत, नृत्य और प्रार्थनाओं का आयोजन किया जाता है, जो बुराई को दूर करने और अच्छाई की विजय का प्रतीक है। गांवों में लोग एकत्रित होकर देवी-देवताओं की पूजा करते हैं और पारंपरिक व्यंजन तैयार करते हैं, जैसे अखरोट, जो इस अवसर पर विशेष रूप से बनाए जाते हैं।

समुदाय की एकता और सांस्कृतिक संरक्षण

स्थानीय निवासी बताते हैं, "बुढ़ी दिवाली की परंपरा बहुत पुरानी है, जो प्राचीन रीति-रिवाजों और परंपराओं को संरक्षित करती है। आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बावजूद, समुदाय इस पर्व को मनाता है, देवताओं की पूजा करता है और पारंपरिक नृत्य और गीतों में भाग लेता है। यह पवित्र उत्सव परिवारों को एकजुट करता है और आनंदित करता है।"

पारंपरिक व्यंजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम

इस दौरान विशेष पारंपरिक व्यंजन जैसे मुड़ा, शाकुली, बेडोली, गुलगुले, पटांडे, असकली आदि बनाए जाते हैं, जिन्हें शुद्ध देसी घी के साथ खाया और परोसा जाता है। गांवों में सांस्कृतिक संध्याएं आयोजित की जाती हैं, जहां लोग पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य और संगीत प्रस्तुत करते हैं, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करता है।

समुदाय की सक्रिय भागीदारी

गिरिपार क्षेत्र के लोग इस पर्व को बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं, जो उनकी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं के प्रति गहरी निष्ठा को दर्शाता है। यह उत्सव न केवल बुराई को दूर करने का प्रतीक है, बल्कि समुदाय की एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करता है।

बुढ़ी दिवाली का यह उत्सव सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और समुदाय की एकता का प्रतीक है, जो आधुनिकता के बावजूद अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है।


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