( अल सवेरे 11 फैस ले आपके समक्ष) सुप्रीम कोर्ट ने डिस्चार्ज याचिका पर महत्वपूर्ण निर्णय दिया: केवल चार्जशीट के दस्तावेज़ ही होंगे मान्य
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2024-12-02 09:31:38

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि डिस्चार्ज याचिका पर विचार करते समय केवल वही दस्तावेज़ मान्य होंगे जो चार्जशीट का हिस्सा हैं। न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह की पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट को चार्जशीट के बाहर के दस्तावेज़ों पर विचार करने का अधिकार नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला एक पति द्वारा दायर की गई याचिका से संबंधित है, जिसमें आरोप था कि उसकी पत्नी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 498A, 406 और 34 के तहत उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। पति ने विवाह को अमान्य घोषित करने के लिए एकपक्षीय आदेश प्राप्त किया था, जिसे पत्नी ने चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट का आदेश और सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को आदेश दिया था कि वह विवाह की शून्यता और संबंधित अपील दस्तावेज़ों पर विचार करे, जो चार्जशीट का हिस्सा नहीं थे। सुप्रीम कोर्ट ने इसे कानूनी दृष्टि से गलत मानते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट को केवल चार्जशीट के दस्तावेज़ों पर ही विचार करना चाहिए।
न्यायालय की टिप्पणी
न्यायालय ने कहा, "हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को चार्जशीट के बाहर के दस्तावेज़ों पर विचार करने का निर्देश देकर एक गंभीर त्रुटि की है।" इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि ट्रायल कोर्ट को चार्जशीट के बाहर के दस्तावेज़ों पर विचार करने का अधिकार नहीं है।
अगला कदम
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को हाईकोर्ट में वापस भेजते हुए निर्देश दिया है कि 17 दिसंबर 2024 को मामले की सुनवाई की जाए। इससे संबंधित सभी पक्षों को उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि ट्रायल कोर्ट को केवल चार्जशीट के दस्तावेज़ों पर ही विचार करना चाहिए, और चार्जशीट के बाहर के दस्तावेज़ों पर विचार करना कानूनी दृष्टि से गलत है। यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को सुनिश्चित करने में सहायक होगा।