वक्फ संशोधन विधेयक: संसदीय समिति ने राज्य सरकारों से वक्फ संपत्तियों की जानकारी मांगी


के कुमार आहूजा  2024-12-02 09:06:03



 

संसद की एक संसदीय समिति ने वक्फ संशोधन विधेयक की समीक्षा करते हुए राज्य सरकारों से उन वक्फ संपत्तियों की सत्यता और अद्यतन जानकारी मांगी है, जिन पर अनधिकृत कब्जे का आरोप है। यह कदम 2005-06 में सच्चर समिति की रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों के संदर्भ में उठाया गया है।

सच्चर समिति की रिपोर्ट और अनधिकृत कब्जे

सच्चर समिति ने 2005-06 में विभिन्न राज्य वक्फ बोर्डों से जानकारी प्राप्त की थी, जिसमें दिल्ली में 316, राजस्थान में 60, कर्नाटक में 42, मध्य प्रदेश में 53, उत्तर प्रदेश में 60 और ओडिशा में 53 वक्फ संपत्तियों पर अनधिकृत कब्जे का उल्लेख था। इन आंकड़ों के आधार पर, संसदीय समिति ने संबंधित राज्यों से इन संपत्तियों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत जानकारी मांगी है।

वक्फ अधिनियम की धारा 40 और विवाद

वर्तमान वक्फ अधिनियम की धारा 40, जो 2013 में कांग्रेस-नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान संशोधित हुई थी, वक्फ बोर्डों को किसी संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित करने का अधिकार देती है। यह प्रावधान विवादास्पद रहा है, क्योंकि इसके माध्यम से वक्फ बोर्डों को संपत्ति की स्वामित्व पर निर्णय लेने का अधिकार मिलता है।

विधेयक में प्रस्तावित संशोधन और विपक्षी प्रतिक्रिया

सरकार ने वक्फ अधिनियम में संशोधन के लिए एक विधेयक प्रस्तुत किया है, जिसका उद्देश्य वक्फ बोर्डों की शक्तियों को सीमित करना है। विपक्षी दल और विभिन्न मुस्लिम संगठनों ने इस विधेयक का विरोध किया है, उनका कहना है कि यह धार्मिक मामलों में सरकार की अनावश्यक दखलअंदाजी है।

संसदीय समिति की विस्तारित अवधि और कार्य

लोकसभा ने 28 नवंबर को एक प्रस्ताव पारित किया, जिसके तहत संसदीय समिति की अवधि को अगले बजट सत्र के अंतिम दिन तक बढ़ा दिया गया है। समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा है कि वे सभी विपक्षी सदस्यों के दृष्टिकोण को शामिल कर चुके हैं और रिपोर्ट तैयार करने के लिए तैयार हैं।

वक्फ संशोधन विधेयक और संसदीय समिति की समीक्षा वक्फ संपत्तियों के स्वामित्व और प्रबंधन के मुद्दे पर महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म देती है। राज्य सरकारों से जानकारी प्राप्त करने और विधेयक में प्रस्तावित संशोधनों के माध्यम से सरकार वक्फ बोर्डों की शक्तियों को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है, जबकि विपक्षी दल और मुस्लिम संगठन इसे धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप मानते हैं।


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