मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने विज्ञापन की अस्पष्टता पर दी अहम टिप्पणी: उम्मीदवार को मिलेगा लाभ
के कुमार आहूजा 2024-12-02 07:59:00

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि किसी विज्ञापन में योग्यताओं को लेकर अस्पष्टता और संदेह उत्पन्न होता है, तो इसका लाभ हमेशा उम्मीदवार को दिया जाना चाहिए, न कि नियोक्ता को। न्यायालय ने यह टिप्पणी तब की जब एक उम्मीदवार ने अपने साक्षात्कार में भाग लेने से रोके जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी।
क्या था मामला?
यह मामला एक ऐसे उम्मीदवार का था, जिसे एक सरकारी विज्ञापन के माध्यम से साक्षात्कार में भाग लेने का अवसर नहीं दिया गया था। विज्ञापन में यह कहा गया था कि केवल वही उम्मीदवार साक्षात्कार में भाग ले सकता है, जिसने सहायक अभियंता के पद पर 15 वर्षों का अनुभव प्राप्त किया हो, जिसमें से 10 वर्षों का अनुभव क्षेत्र में होना आवश्यक है। हालांकि, याचिकाकर्ता का दावा था कि वह इस योग्यता अथवा आवश्यकता को पूरा करता था, फिर भी उसे साक्षात्कार में शामिल होने का अवसर नहीं दिया गया।
उम्मीदवार का पक्ष
याचिकाकर्ता ने अपने वकील के माध्यम से यह दावा किया कि विज्ञापन में दी गई योग्यताएं पूरी करने के बावजूद, उसे साक्षात्कार में नहीं बुलाया गया। उन्होंने यह कहा कि उन्होंने सहायक अभियंता के पद पर 11 वर्षों, 9 महीनों और 27 दिनों तक काम किया, जिसमें से अधिकांश समय वह कार्यकारी अभियंता के रूप में काम कर रहे थे। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि नियोक्ता ने अनुचित रूप से शर्तों का गलत अर्थ निकाला और उसे साक्षात्कार से वंचित कर दिया।
नियोक्ता का पक्ष
नियोक्ता के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता ने जो अवधि सहायक अभियंता के रूप में काम की, उसमें वह वास्तविक रूप से सहायक अभियंता नहीं थे, बल्कि उन्हें अतिरिक्त कार्यभार के रूप में यह जिम्मेदारी दी गई थी। इसके अलावा, जब याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त हुए, तो वह कार्यकारी अभियंता के रूप में कार्य कर रहे थे। इस प्रकार, उन्होंने यह तर्क दिया कि याचिकाकर्ता योग्य नहीं थे और उन्हें साक्षात्कार में शामिल होने का अधिकार नहीं था।
हाईकोर्ट की सुनवाई
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस विज्ञापन में जो योग्यताएँ दी गई थीं, उनमें अस्पष्टता थी। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि जो शर्तें विज्ञापन में दी गई थीं, उनमें यह कहा गया था कि उम्मीदवार को सहायक अभियंता के पद पर 15 वर्षों का अनुभव होना चाहिए, लेकिन यह शर्त यह भी नहीं कहती कि उम्मीदवार ने सहायक अभियंता के पद पर केवल संप्रभु रूप से काम किया हो।
न्यायालय ने कहा, "यह निर्विवादित है कि याचिकाकर्ता ने सहायक अभियंता के रूप में 15 वर्षों का अनुभव प्राप्त किया था, भले ही बाद में वह कार्यकारी अभियंता के रूप में काम कर रहे थे।" अदालत ने यह भी कहा कि यह बात नियोक्ता के पक्ष में नहीं जाती कि याचिकाकर्ता को कार्यकारी अभियंता के रूप में काम करने के कारण अयोग्य माना जाए, क्योंकि उनका सहायक अभियंता के रूप में 15 वर्षों का अनुभव था।
विज्ञापन में अस्पष्टता पर आपत्ति
कोर्ट ने यह भी कहा कि विज्ञापन में दी गई शर्तें "स्पष्टता, सटीकता और उचित भाषा से रहित थीं", जिससे उम्मीदवारों को विज्ञापन के असल प्रभाव का सही अंदाजा नहीं हो सका। अदालत ने इसे "कानूनी दृष्टिकोण से अस्वीकार्य" करार दिया। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस प्रकार के अस्पष्ट विज्ञापनों को कानूनी रूप से मान्यता नहीं दी जा सकती।
कोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए नियोक्ता को आदेश दिया कि वह याचिकाकर्ता की आवेदन को स्वीकार करे और उसके लिए एक नया साक्षात्कार आयोजित करे। इसके बाद, उचित चयन प्रक्रिया के अनुसार उम्मीदवार के चयन पर निर्णय लिया जाएगा।