दिल्ली हाईकोर्ट ने कस्टम्स ड्यूटी पुनःमूल्यांकन पर अहम आदेश दिया, आयातक को मिलेगा न्याय
के कुमार आहूजा 2024-12-02 07:23:45

दिल्ली हाईकोर्ट ने कस्टम्स ड्यूटी पुनःमूल्यांकन पर अहम आदेश दिया, आयातक को मिलेगा न्याय
♦ आयातक को मिलेगा कस्टम्स ड्यूटी पुनःमूल्यांकन पर सवाल उठाने का अधिकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अहम आदेश में कहा कि यदि आयातक कस्टम्स ड्यूटी के पुनःमूल्यांकन को विरोध जताते हुए स्वीकार करता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसने पुनःमूल्यांकन के फैसले को चुनौती देने का अधिकार त्याग दिया है। कोर्ट ने यह निर्णय आयातकों की याचिका पर दिया, जो कस्टम्स ड्यूटी पुनःमूल्यांकन के खिलाफ थे, और जो अपने सामान की त्वरित क्लीयरेंस के लिए पुनःमूल्यांकन को स्वीकार करने के लिए मजबूर थे।
मामले की पृष्ठभूमि
इस मामले में, आयातक, जो पॉलिएस्टर निटेड फैब्रिक के आयातक थे, ने कस्टम्स ड्यूटी पुनःमूल्यांकन के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी। सीईएसएटी (कस्टम, एक्साइज और सर्विस टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल) ने यह निर्णय लिया था कि आयातकों ने कस्टम्स अधिकारियों द्वारा किए गए पुनःमूल्यांकन को स्वीकार करके अपना अधिकार त्याग दिया था। आयातकों का दावा था कि उन्हें सिर्फ त्वरित क्लीयरेंस के लिए पुनःमूल्यांकन स्वीकार करना पड़ा, लेकिन वे इसे विरोध जताते हुए स्वीकार कर रहे थे।
कोर्ट का दृष्टिकोण
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले की गहन सुनवाई करते हुए कहा कि आयातकों का विरोध और क्लीयरेंस के लिए किया गया प्रस्ताव कोई भी स्पष्ट इन्कार या अधिकार छोड़ने का संकेत नहीं देता। कोर्ट ने यह भी कहा कि कस्टम्स अधिकारियों द्वारा पुनःमूल्यांकन की प्रक्रिया में जो बदलाव किया गया, वह केवल विवादित मूल्य के बारे में था और इससे आयातक के अधिकारों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा और न्यायमूर्ति रविंद्र दुडे़जा की बेंच ने अपने निर्णय में कहा, "आयातक का पुनःमूल्यांकन स्वीकार करना किसी भी तरह से उसके अधिकार को समाप्त करने का कारण नहीं हो सकता। इस फैसले को कानूनी तरीके से चुनौती देने का अधिकार आयातक को प्राप्त है।"
कस्टम्स विभाग की दलील
कस्टम्स विभाग ने यह दावा किया था कि आयातकों ने अपने अधिकारों को त्याग दिया था, क्योंकि उन्होंने पुनःमूल्यांकन को बिना किसी आपत्ति के स्वीकार कर लिया था। विभाग ने यह भी कहा कि आयातकों ने "छुट्टी प्राप्त करने" के लिए कस्टम्स अधिकारी के समक्ष अपनी शर्तें स्वीकार की थीं।
हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि आयातकों ने किसी प्रकार से अपने अधिकारों को त्यागा नहीं था। इसके बजाय, उन्होंने "बिना पूर्वाग्रह" के क्लीयरेंस के लिए अपनी शर्तें स्वीकार की थीं, ताकि व्यापार में कोई विघ्न न आए।
न्यायालय का निर्णय
कोर्ट ने कहा कि कस्टम्स विभाग द्वारा पुनःमूल्यांकन का आधार केवल एनआईडीबी (नेशनल इम्पोर्ट डाटाबेस) से प्राप्त आंकड़े थे, जो अकेले निर्णायक नहीं हो सकते। कोर्ट ने यह भी कहा कि कस्टम्स अधिकारियों द्वारा आयातित वस्तुओं के मूल्य में वृद्धि केवल एनआईडीबी डेटा पर आधारित नहीं हो सकती। सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए, हाईकोर्ट ने कहा कि एनआईडीबी डेटा के आधार पर मूल्य में वृद्धि को न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता।
कोर्ट ने आयातकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि कस्टम्स अधिकारियों द्वारा की गई पुनःमूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह से स्वतंत्र और वैध साक्ष्यों से समर्थित होनी चाहिए।
अंतिम आदेश
अंत में, दिल्ली हाईकोर्ट ने कस्टम्स विभाग के फैसले को खारिज करते हुए आयातकों के पक्ष में फैसला दिया। अदालत ने कस्टम्स विभाग को आदेश दिया कि वह पुनःमूल्यांकन के फैसले पर पुनः विचार करे और उचित प्रक्रिया के तहत सही मूल्यांकन करें।