भारत में मचेगा तहलका! दुबई में खरीदी गई अघोषित प्रॉपर्टीज की 500 से ज्यादा जांच, टैक्स चोरी का खुलासा


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2024-12-01 15:18:47



 

दुनिया भर में काले धन और टैक्स चोरी के मामलों को लेकर सरकार की नजर लगातार तेज हो रही है। अब एक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है जिसमें भारत के नागरिकों ने दुबई में बड़ी मात्रा में अचल संपत्ति खरीदी है, लेकिन उन्हें भारतीय टैक्स अधिकारियों से छिपाया गया। इस रहस्यमय मामले में टैक्स विभाग ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है, और अगर यह जांच पूरी तरह से फैलती है, तो इसके परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं।

इनकम टैक्स विभाग की कार्रवाई:

भारत सरकार के इनकम टैक्स विभाग ने हाल ही में ऐसे 500 मामलों का खुलासा किया है, जिनमें भारतीय नागरिकों ने दुबई में अचल संपत्ति खरीदी है लेकिन उसे भारतीय टैक्स नेटवर्क में घोषित नहीं किया। इनकम टैक्स विभाग अब इन मामलों में बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है। सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब दिल्ली में विभाग ने एक रेड (छापेमारी) की, जिसके दौरान 700 करोड़ रुपये से अधिक के ऐसे वित्तीय लेन-देन का पता चला, जिनका कोई हिसाब नहीं था।

हजारों करोड़ की टैक्स चोरी का अंदेशा:

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली स्थित इनकम टैक्स विभाग के इंवेस्टिगेशन विंग ने एक दर्जन से अधिक सर्वे और सर्च ऑपरेशन किए हैं। इन ऑपरेशनों के दौरान दुबई में 43 अघोषित प्रॉपर्टीज के सबूत मिले हैं। केवल दिल्ली में 700 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का मामला सामने आया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अगर यह जांच पूरे देश में फैलती है, तो टैक्स चोरी का यह मामला हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

जर्मनी से प्राप्त जानकारी:

हाल ही में जर्मनी ने भारत के साथ डबल टैक्सेशन अवॉईडेंस एग्रीमेंट (DTAA) के तहत सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए भारतीयों द्वारा पश्चिम एशिया में खरीदी गई संपत्तियों का डेटा साझा किया। इस डेटा के माध्यम से 1000 से अधिक भारतीय नागरिकों के स्वामित्व वाली संपत्तियों का खुलासा हुआ है। हालांकि, यह जानकारी जर्मन अधिकारियों को कैसे मिली, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। लेकिन यह डेटा इनकम टैक्स विभाग के लिए अहम साबित हो सकता है, क्योंकि इससे कई संपत्तियों की वास्तविक स्थिति का खुलासा हुआ है।

नकली रसीदें और बेहिसाब कैश निवेश:

इनकम टैक्स विभाग के दिल्ली स्थित छापेमारी के दौरान टैक्सपेयर्स ने 125 करोड़ रुपये से अधिक के अघोषित कैश निवेश करने की बात स्वीकार की है। इसके अलावा, विभाग को बोगस रसीदें और कैश पेमेंट्स के रिकॉर्ड भी मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। विभाग इस जांच में यह पता लगा रहा है कि विदेशों में बेहिसाब कैश जमा करने के तरीके, अघोषित जमा कैश और इसमें काले धन की संभावना का खुलासा कैसे किया जाए।

ब्लैक मनी एक्ट के तहत कार्रवाई:

इनकम टैक्स विभाग ने इस मामले में ब्लैक मनी एक्ट और इनकम टैक्स एक्ट के तहत कार्रवाई करने की संभावना भी व्यक्त की है। विभाग का कहना है कि विदेशों में हुई अघोषित संपत्ति खरीदारी और टैक्स चोरी की जांच में ब्लैक मनी एक्ट के तहत कार्रवाई संभव है, ताकि इस तरह की अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। विभाग इन मामलों को सख्ती से निपटने की योजना बना रहा है।

यह घटनाक्रम निश्चित रूप से टैक्स चोरी और काले धन पर भारतीय सरकार की सख्त नीति को उजागर करता है। इस जांच की प्रक्रिया आगे और भी कई रहस्यों से पर्दा उठा सकती है। यह मामला न केवल दुबई में संपत्तियों की खरीद से जुड़ा है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय सूचनाओं के आदान-प्रदान से भारतीय अधिकारियों को बड़ी सफलता मिल सकती है। अब देखना यह है कि इस जांच का क्या असर पड़ता है और कितनी बड़ी कार्रवाई होती है।


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