मेरिट के आधार पर मेडिकल कॉलेज आवंटन में तकनीकी अड़चनें नहीं बन सकतीं बाधा -राजस्थान हाई कोर्ट 


के कुमार आहूजा  2024-11-30 16:07:31



 

राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए मेरिट ही सर्वोच्च मानदंड होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि तकनीकी कारणों से योग्य उम्मीदवारों को वंचित नहीं किया जा सकता। यह निर्णय उन छात्रों के लिए राहत का कारण बना है, जो तकनीकी कारणों से प्रवेश प्रक्रिया में अड़चनों का सामना कर रहे थे।

मामले की पृष्ठभूमि: 

याचिकाकर्ताओं ने NEET-UG 2024 परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था और वे मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए पात्र थे। हालांकि, दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान, उन्हें कक्षा 11 की मार्कशीट में 'जीवविज्ञान' विषय का उल्लेख न होने के कारण आपत्ति का सामना करना पड़ा। यह स्थिति COVID-19 महामारी के दौरान कक्षा 11 से 12 में पदोन्नति के कारण उत्पन्न हुई थी, जब सरकार ने सभी छात्रों के लिए यह प्रक्रिया लागू की थी।

कोर्ट की टिप्पणियाँ: 

कोर्ट ने माना कि तकनीकी कारणों से योग्य उम्मीदवारों को वंचित करना उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा, "मेरिट ही एकमात्र मानदंड होना चाहिए, और तकनीकी औपचारिकताएं मेधावी उम्मीदवारों के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकतीं।" कोर्ट ने यह भी कहा कि दस्तावेज़ सत्यापन की प्रक्रिया में पर्याप्त समय नहीं दिया गया, जिससे उम्मीदवारों को आवश्यक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने में कठिनाई हुई।

प्रवेश प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता: 

कोर्ट ने सुझाव दिया कि प्रवेश प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है, ताकि तकनीकी कारणों से योग्य उम्मीदवारों को वंचित न किया जाए। कोर्ट ने कहा, "चयन प्रक्रिया में केवल योग्यता, निष्पक्षता और पारदर्शिता के आधार पर उम्मीदवार पर विचार करना, चयन/एडमिशन प्रक्रिया का मूलमंत्र है।"

यह निर्णय उन छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है, जो तकनीकी कारणों से प्रवेश प्रक्रिया में अड़चनों का सामना कर रहे थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मेरिट ही सर्वोच्च मानदंड होना चाहिए, और तकनीकी औपचारिकताएं मेधावी उम्मीदवारों के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकतीं।


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