बंगाल में भगवान् हनुमान की प्रतिमा को किया खंडित, ममता सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
के कुमार आहूजा 2024-11-30 07:40:10

बंगाल के बर्दवान जिले में स्थित एक हनुमान मंदिर में हुए तांडव ने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। गुरुवार रात को मंदिर में हुई तोड़फोड़ की घटना ने हिंदू समाज में गुस्से का माहौल पैदा कर दिया। एक तरफ जहां ममता सरकार की नीयत पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस हिंसा के खिलाफ राजनीति भी तेज हो गई है। तो क्या पश्चिम बंगाल में हिंदू विरोधी तत्वों के खिलाफ एक्शन लेने में सरकार नाकाम हो रही है? आइए, जानते हैं इस पूरी घटना के बारे में विस्तार से।
बंगाल के बर्दवान में हनुमान मंदिर की तोड़फोड़:
बंगाल के बीरभूम जिले के इन्द्रगाछा मोरे स्थित हनुमान मंदिर में गुरुवार रात कथित रूप से तोड़फोड़ की गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें भगवान हनुमान की मूर्ति जमीन पर पड़ी दिखाई दे रही है और मूर्ति के टुकड़े चारों ओर बिखरे हुए थे। वीडियो सामने आते ही राजनीति गरमा गई। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस कृत्य की कड़ी निंदा की और ममता सरकार पर आरोप लगाया कि वह इन घटनाओं के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई करने में असफल रही है।
सुवेंदु अधिकारी का आरोप:
सुवेंदु अधिकारी ने इस हमले को हिंदू विरोधी कृत्य बताया और ममता सरकार को निशाना बनाया। उन्होंने कहा, "कल रात बदमाशों ने हनुमान मंदिर में तोड़फोड़ की और बजरंगबली की मूर्ति को अपवित्र किया। पश्चिम बंगाल में अब हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ करना एक गंभीर समस्या बन गई है। मैं पश्चिम बंगाल पुलिस के डीजीपी राजीव कुमार से अपील करता हूं कि जल्द से जल्द दोषियों को गिरफ्तार किया जाए।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बंगाल पुलिस का लगातार निष्क्रिय रहना इन अपराधियों को और अधिक प्रोत्साहित कर रहा है, और यह घटना इसकी एक और मिसाल है।
बंगाल सरकार का रुख:
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर बयान दिया और कहा कि इस मामले में राज्य सरकार की भूमिका सीमित है। उन्होंने केंद्रीय सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उठाए गए कदमों का समर्थन किया और कहा कि बंगाल सरकार केंद्र के निर्णय के साथ खड़ी है। ममता बनर्जी का यह बयान उस समय आया जब बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के मामलों को लेकर पूरे देश में गुस्से की लहर चल रही थी।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमला और भारत में विरोध प्रदर्शन:
यह घटना बंगाल के एक मंदिर में हुई तो वहीं बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों और संपत्तियों पर हमले की खबरों के बीच भारतीय राजनीति में उबाल आ गया है। दिल्ली पुलिस ने एक ओर मामला दर्ज किया, जिसमें जंसत्ता दल के नेता कुंवर अक्षय प्रताप सिंह और उनके सैकड़ों कार्यकर्ताओं को बांग्लादेश उच्चायोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया। इन कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में एक ज्ञापन भेजने का प्रयास किया था।
दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और गिरफ्तारी:
जनसत्ता दल के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश भवन से बांग्लादेश उच्चायोग तक पैदल मार्च किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेड्स लगाये, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ते हुए पुलिस से धक्का-मुक्की की और आगे बढ़ने की कोशिश की। बाद में दिल्ली पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस घटना ने बांग्लादेश में हिंदू धर्म के अनुयायियों के खिलाफ हो रही हिंसा की ओर देश का ध्यान आकर्षित किया है।
पश्चिम बंगाल में हनुमान मंदिर पर हमला, बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों पर हो रही हिंसा, और भारत में उसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं, जबकि देशभर के विभिन्न राजनीतिक दल बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। क्या ममता बनर्जी सरकार इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाएगी, या यह मामला राजनीतिक खेल का हिस्सा बनकर रह जाएगा? यह सवाल अब हर किसी के दिमाग में है।