सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश: महिला सरपंचों के खिलाफ नौकरशाही उत्पीड़न पर कड़ी टिप्पणी
के कुमार आहूजा 2024-11-30 05:27:24

छत्तीसगढ़ के साजबहार ग्राम पंचायत की 27 वर्षीय महिला सरपंच को उनके पद से हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। कोर्ट ने महिला प्रतिनिधियों के खिलाफ बढ़ते नौकरशाही उत्पीड़न पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
मामले का विवरण:
2020 में साजबहार ग्राम पंचायत की सरपंच चुनी गई महिला को 2023 में निर्माण कार्यों में देरी के आरोप में पद से हटा दिया गया था। उच्च न्यायालय से राहत न मिलने पर, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय:
कोर्ट ने पाया कि देरी सरपंच के कारण नहीं थी और कार्रवाई मनमानी थी। निर्माण कार्यों में इंजीनियरों, ठेकेदारों, सामग्री आपूर्ति और मौसम की अनिश्चितताओं का योगदान था। महिला सरपंच को बहाल करते हुए, कोर्ट ने उन्हें 1 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
नौकरशाही उत्पीड़न पर चिंता:
कोर्ट ने टिप्पणी की कि महिला सरपंचों के खिलाफ नौकरशाही अधिकारियों और पंचायत सदस्यों का गठजोड़ चिंताजनक है, जो पूर्वाग्रह और भेदभाव को दर्शाता है। यह लोकतांत्रिक मूल्यों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
प्रशासनिक अधिकारियों की आलोचना:
कोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों की मानसिकता पर सवाल उठाया, जो निर्वाचित प्रतिनिधियों को नौकरशाही के अधीन मानते हैं। यह रवैया लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और स्वायत्तता का उल्लंघन है।
महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता:
कोर्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों से महिला नेतृत्व को प्रोत्साहित करने और भेदभावपूर्ण रवैये को समाप्त करने की अपील की। महिला प्रतिनिधियों को उनके अधिकारों से वंचित करना देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में बाधा डालता है।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय महिला प्रतिनिधियों के अधिकारों की रक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण कदम है। यह नौकरशाही उत्पीड़न के खिलाफ एक मजबूत संदेश है।