एक टीस  सी दिल में होती है, एक दर्द जिगर में होता है, हम रात को बैठकर रोते हैं, जब सारा आलम सोता है


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2024-11-30 05:08:10



 

ना कद है ना कोई पद 

ना अहंकार ना कोई सनक, 

स्वाभिमानी आम इंसान हूँ। 

आप जितना अच्छा 

शायद ना भी होऊँ, 

लेकिन ये सच है कि 

बुरा बिलकुल नहीं हू। 

कौन कहता है मैं झुकता नहीं हूँ, 

यकीनन मैं झुकता हूँ 

मगर झुकता हूँ 

प्रेम के आगे, रिश्तों के आगे 

मर्यादा, सरलता, सहजता 

और मित्रों के आगे, 

झुकता हूँ माँ बाप के आगे 

झुकता हूँ इष्ट और गुरु के आगे 

झुकता हूँ माँ-बाप तुल्य

भाई बहिनों के सामने 

झुकता हूँ सच के सामने 

झुकता हूँ समय के सामने 

झुकता हूँ सम्मान के सामने 

झुकता हूँ अहसान के सामने 

झुकता हूँ उस इंसान के सामने 

जिसने कोई अहसान किया 

झुकता हूँ उसके सामने 

जो बुरे वक्त मेँ

हमारे साथ खड़ा रहा, 

इन के सामने पूरी श्रद्धा और 

विनम्रता के साथ झुकता हूँ, 

यकीनन नहीं झुकता 

पद और कद के सामने, 

नहीं झुकता झूठ के सामने 

उसके सामने तो झुकना 

बिलकुल गवारा ही नहीं 

जो किसी भी सूरत मेँ हमारा नहीं, 

पद और कद का मैं 

सम्मान करता हूँ 

उनका यथोचित मान करता हूँ 

पद और कद मेँ 

विनम्रता, सहजता, संवेदनशीलता 

और सरलता होने पर 

फिर मैं कहा रुकता हूँ 

ऐसे पद और कद के सामने 

पूरे सम्मान के साथ झुकता हूँ, 

क्या करूँ ऐसा ही हूँ 

वक्त ने जैसा बनाया 

मैं तो वैसा ही हूँ।

लेखक, चिंतक, विचारक, संपादक पूर्व  pro मनोहर

चावला के कलम से


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