विवाह के वादे पर बलात्कार का आरोप: सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2024-11-28 08:30:18



 

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्त्वपूर्ण निर्णय में झूठे विवाह के वादे पर बलात्कार के मामलों में बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर चिंता व्यक्त की है। यह निर्णय उन मामलों पर लागू होता है जहां लंबे समय तक सहमति से चले रिश्ते के बाद विवाद उत्पन्न हुआ और इसे आपराधिक दायरे में लाने का प्रयास किया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामले में एक पुरुष पर शिकायतकर्ता ने लगभग 10 वर्षों तक सहमति से चले संबंध के बाद झूठे विवाह के वादे का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करवाई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाए। यह एफआईआर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (बलात्कार), 420 (धोखाधड़ी), 504 (जानबूझकर अपमान), और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दर्ज की गई थी​।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति बीवी नागरथना और एन कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कहा कि लंबे समय तक सहमति से चले रिश्ते को अचानक आपराधिक रूप देना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। अदालत ने यह भी जोड़ा कि अगर शारीरिक संबंध केवल विवाह के वादे पर आधारित नहीं थे, तो इसे बलात्कार के तहत आपराधिक घोषित करना गलत होगा।

न्यायालय ने यह कहा कि सहमति से बने रिश्ते को आपराधिक रूप से जोड़ा नहीं जा सकता, जब तक यह स्पष्ट रूप से सिद्ध न हो कि वह केवल झूठे वादे पर आधारित थे। अदालत ने कहा कि इस प्रकार के मामले न केवल कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हैं, बल्कि सामाजिक रिश्तों को भी प्रभावित करते हैं​।

फैसला

अदालत ने आरोपी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए एफआईआर को रद्द कर दिया। न्यायालय ने माना कि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच लगभग एक दशक तक सहमति से संबंध रहे, और शिकायतकर्ता ने खुद को आरोपी की पत्नी के रूप में संदर्भित किया। इसके अलावा, आरोपों में देरी और वित्तीय सहायता के समाप्त होने के बाद मामला दर्ज होना दर्शाता है कि आरोप व्यक्तिगत झगड़े के कारण लगाए गए थे​।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला झूठे आरोपों के खिलाफ महत्वपूर्ण संदेश देता है और सहमति से बने रिश्तों को कानूनी दुरुपयोग से बचाने की दिशा में एक कदम है।


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