(वरिष्ठ न्यायाधीशों के अहम फैसले)  कर्नाटक उच्च न्यायालय: महिला कर्मचारियों के मातृत्व और चाइल्ड केयर लीव पर फिर से सोचने का निर्देश


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2024-11-28 06:37:24



 

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हाल ही में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है, जिसमें संस्थान को एक महिला नर्स को 120 दिन का चाइल्ड केयर लीव (CCL) देने का निर्देश दिया गया है। यह निर्णय उस समय आया जब NIMHANS ने S. अनिता जोसेफ नामक नर्स के लीव आवेदन को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि एक स्तनपान कराती मां का यह मौलिक अधिकार है कि वह अपने बच्चे के साथ पर्याप्त समय बिता सके, और यह अधिकार संविधान के तहत संरक्षित है।

मामले की पृष्ठभूमि:

यह मामला S. अनिता जोसेफ द्वारा दायर एक आवेदन से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने NIMHANS से 120 दिन की चाइल्ड केयर लीव की मांग की थी। पहले NIMHANS ने इसे खारिज कर दिया था, यह कहते हुए कि उनकी संस्थान की नीतियाँ सिर्फ 45 दिन की चाइल्ड केयर लीव की अनुमति देती हैं और ICU में स्टाफ की कमी का हवाला दिया। हालांकि, केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) ने अनिता के पक्ष में फैसला देते हुए कहा था कि NIMHANS को अपनी नीतियों में लचीलापन दिखाना चाहिए।

कर्नाटक उच्च न्यायालय का फैसला:

कर्नाटक उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने CAT के आदेश को बरकरार रखते हुए NIMHANS को निर्देश दिया कि वह S. अनिता जोसेफ को 120 दिन की चाइल्ड केयर लीव प्रदान करे। न्यायमूर्ति कृष्ण एस. दीक्षित और न्यायमूर्ति सी. एम. जोशी ने कहा कि NIMHANS एक सरकारी संस्थान है और इसे अपने महिला कर्मचारियों के लिए मातृत्व और चाइल्ड केयर लीव के मामले में संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्वक कार्य करना चाहिए।

मातृत्व और चाइल्ड केयर लीव का महत्व:

कोर्ट ने यह भी कहा कि एक स्तनपान कराती मां का यह मौलिक अधिकार है कि वह अपने बच्चे के साथ समय बिता सके और उसे पर्याप्त आहार प्रदान कर सके। न्यायालय ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित मानवाधिकार माना। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि बच्चे का भी यह अधिकार है कि उसे स्तनपान कराया जाए, और यह अधिकार दोनों की भलाई के लिए एकजुट रूप से महत्वपूर्ण है।

NIMHANS की दलीलें और कोर्ट का रुख:

NIMHANS ने कोर्ट में यह तर्क दिया था कि चाइल्ड केयर लीव एक 'हक' नहीं है, और यह किसी विशेष कर्मचारी को दी जाने वाली छुट्टी की स्वीकृति के लिए कई फैक्टरों को ध्यान में रखना पड़ता है। हालांकि, अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि चाइल्ड केयर लीव की अहमियत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और इसे सरकार द्वारा स्वीकृत नियमों के तहत प्रदान किया जाना चाहिए।

न्यायालय का अंतिम आदेश:

अदालत ने NIMHANS की दलील को अस्वीकार करते हुए CAT के आदेश को पूरी तरह से स्वीकार किया और आदेश दिया कि संस्थान तुरंत S. अनिता जोसेफ को उनकी चाइल्ड केयर लीव प्रदान करे।

यह निर्णय न केवल महिला कर्मचारियों के अधिकारों के संरक्षण के रूप में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सरकारी संस्थानों को महिला कर्मचारियों के मातृत्व और चाइल्ड केयर लीव के प्रति सहानुभूति दिखाने का भी एक स्पष्ट संदेश देता है। इस फैसले ने यह साबित किया कि एक मां और बच्चे का अधिकार किसी भी स्थिति से ऊपर है और इसे हर हालत में मान्यता दी जानी चाहिए।


global news ADglobal news AD