भारत के संविधान की 75वीं वर्षगांठ: संविधान के गौरवशाली सफर पर ऐतिहासिक समारोह
के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा 2024-11-27 19:52:43

भारत के संविधान की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संसद के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। यह समारोह "संविधान दिवस" (26 नवंबर 2024) के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसे भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में मील का पत्थर माना गया है। इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समेत कई गणमान्य नेताओं ने भाग लिया, जो इसकी अहमियत को और बढ़ाता है।
राष्ट्रपति मुर्मु का प्रेरणादायक संबोधन
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने भाषण में संविधान को "जीवंत और प्रगतिशील दस्तावेज़" के रूप में वर्णित किया। उन्होंने संस्कृत और मैथिली में संविधान के अनुवादित संस्करण जारी किए और संविधान की प्रस्तावना का औपचारिक पाठ किया। उन्होंने इसे भारत के सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की आधारशिला बताया। इसके अलावा, उन्होंने महिलाओं के आरक्षण कानून का जिक्र करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र में महिला सशक्तिकरण का नया युग बताया।
समारोह में विशेष आयोजन
कार्यक्रम के दौरान एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया गया, जो भारतीय संविधान की स्थायी विरासत को दर्शाते हैं। राष्ट्रपति ने संविधान सभा की 15 महिला सदस्यों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उन्होंने न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका के बीच शक्ति संतुलन के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
उपराष्ट्रपति का संदेश: लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करें
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संविधान को भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ बताया। उन्होंने सांसदों को लोकतंत्र के "रक्षक" कहा और उन्हें लोकतांत्रिक संस्थानों की पवित्रता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने आपातकाल (1975-77) को "लोकतंत्र के लिए सबसे काला दौर" करार दिया और 25 जून को इसे याद रखने का प्रस्ताव रखा। धनखड़ ने संसद में रचनात्मक और गरिमामय बहस की परंपरा को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का वक्तव्य
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संविधान सभा की बहसों को याद किया, जो लगभग तीन वर्षों तक चलीं। उन्होंने संसद को सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का साधन बताते हुए कहा कि पिछले 75 वर्षों में लोकतंत्र में नागरिकों का विश्वास और गहराया है। उन्होंने संसद सदस्यों से गरिमापूर्ण चर्चा की परंपरा बनाए रखने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री मोदी और अन्य नेताओं के संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी संविधान के रचयिताओं को श्रद्धांजलि दी। खड़गे ने संविधान को भारत की "जीवनधारा" बताते हुए इसके आदर्शों की रक्षा का संकल्प व्यक्त किया। अन्य नेताओं ने भी समानता, स्वतंत्रता, और बंधुत्व के मूल्यों को बनाए रखने की अपील की।
संविधान दिवस का इतिहास
26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान को अंगीकार किया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। इसे डॉ. बी. आर. अंबेडकर की अध्यक्षता में तैयार किया गया था। 2015 में इसे आधिकारिक रूप से "संविधान दिवस" घोषित किया गया ताकि संविधान के मूल्यों का प्रचार-प्रसार किया जा सके। इस वर्ष के आयोजन ने संविधान के 75 वर्षों के गौरवशाली सफर को दर्शाया।
संविधान दिवस 2024 का यह समारोह न केवल भारतीय लोकतंत्र की शक्ति और स्थिरता का जश्न था, बल्कि एक ऐसा अवसर भी था, जिसने नागरिकों को संविधान के आदर्शों को अपनाने और देश के विकास में भागीदार बनने के लिए प्रेरित किया।