बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़े अत्याचार: मौलाना मुफ़्ती शहाबुद्दीन रज़वी ने जताई चिंता बांग्लादेश में हाल ही में सरकार में बदलाव और बढ़ती हिंसा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। मौलाना मुफ़्ती शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने बांग्लादेश के हालात


के कुमार आहूजा  2024-11-27 14:57:49



बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़े अत्याचार: मौलाना मुफ़्ती शहाबुद्दीन रज़वी ने जताई चिंता

बांग्लादेश में हाल ही में सरकार में बदलाव और बढ़ती हिंसा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। मौलाना मुफ़्ती शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने बांग्लादेश के हालात को "अराजक और चिंताजनक" बताते हुए वहां अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते अत्याचार पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

सत्ता परिवर्तन और मोहम्मद यूनुस का उदय

प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने और मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनने के बाद देश में अस्थिरता बढ़ गई है। विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के चलते हसीना को देश छोड़ना पड़ा। मोहम्मद यूनुस ने नई सरकार की कमान संभालते हुए चुनाव कराने का वादा किया है। हालांकि, इस बदलाव ने धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए खतरनाक माहौल पैदा कर दिया है​।

अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले

शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद हिंदू, बौद्ध और ईसाई अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 200 से अधिक हिंदू घर और व्यापारिक प्रतिष्ठान जला दिए गए, और 20 से अधिक मंदिरों में तोड़फोड़ की गई है। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के महासचिव राणा दासगुप्ता ने बताया कि यह घटनाएं पूरे देश में फैली हुई हैं, जिससे अल्पसंख्यक समुदायों में डर और असुरक्षा बढ़ रही है​।

बांग्लादेश की बिगड़ती स्थिति पर भारतीय प्रतिक्रिया

भारत ने सीमा सुरक्षा बढ़ा दी है और बांग्लादेश से पलायन कर रहे लोगों पर नजर रखी जा रही है। साथ ही, बांग्लादेश के हालात को देखते हुए भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से शांति बनाए रखने की अपील की है। श्रीलंका के राष्ट्रपति ने भी शेख हसीना के योगदान की प्रशंसा की है और बांग्लादेश में स्थिरता की उम्मीद जताई है​।

मौलाना मुफ़्ती रज़वी का बयान

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ़्ती शहाबुद्दीन रज़वी ने बांग्लादेश में बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मोहम्मद यूनुस की सरकार में चरमपंथी विचारधाराओं की बढ़त ने अल्पसंख्यकों के लिए खतरा पैदा कर दिया है। उनका कहना है कि यह घटनाएं न केवल बांग्लादेश के लिए बल्कि पड़ोसी देशों के लिए भी चिंताजनक हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी

बांग्लादेश में हो रहे घटनाक्रम को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कदम उठाने की जरूरत है। भारत जैसे पड़ोसी देश की भूमिका इसमें अहम हो सकती है। धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बांग्लादेश में शांति स्थापित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

 

स्रोत

The Independent: बांग्लादेश के सत्ता परिवर्तन और अल्पसंख्यकों पर हमले।

Hindustan Times: बांग्लादेश के हालात और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं।


बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़े अत्याचार: मौलाना मुफ़्ती शहाबुद्दीन रज़वी ने जताई चिंता बांग्लादेश में हाल ही में सरकार में बदलाव और बढ़ती हिंसा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। मौलाना मुफ़्ती शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने बांग्लादेश के हालात को "अराजक और चिंताजनक" बताते हुए वहां अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते अत्याचार पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सत्ता परिवर्तन और मोहम्मद यूनुस का उदय प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने और मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनने के बाद देश में अस्थिरता बढ़ गई है। विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के चलते हसीना को देश छोड़ना पड़ा। मोहम्मद यूनुस ने नई सरकार की कमान संभालते हुए चुनाव कराने का वादा किया है। हालांकि, इस बदलाव ने धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए खतरनाक माहौल पैदा कर दिया है​। अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद हिंदू, बौद्ध और ईसाई अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 200 से अधिक हिंदू घर और व्यापारिक प्रतिष्ठान जला दिए गए, और 20 से अधिक मंदिरों में तोड़फोड़ की गई है। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के महासचिव राणा दासगुप्ता ने बताया कि यह घटनाएं पूरे देश में फैली हुई हैं, जिससे अल्पसंख्यक समुदायों में डर और असुरक्षा बढ़ रही है​। बांग्लादेश की बिगड़ती स्थिति पर भारतीय प्रतिक्रिया भारत ने सीमा सुरक्षा बढ़ा दी है और बांग्लादेश से पलायन कर रहे लोगों पर नजर रखी जा रही है। साथ ही, बांग्लादेश के हालात को देखते हुए भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से शांति बनाए रखने की अपील की है। श्रीलंका के राष्ट्रपति ने भी शेख हसीना के योगदान की प्रशंसा की है और बांग्लादेश में स्थिरता की उम्मीद जताई है​। मौलाना मुफ़्ती रज़वी का बयान ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ़्ती शहाबुद्दीन रज़वी ने बांग्लादेश में बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मोहम्मद यूनुस की सरकार में चरमपंथी विचारधाराओं की बढ़त ने अल्पसंख्यकों के लिए खतरा पैदा कर दिया है। उनका कहना है कि यह घटनाएं न केवल बांग्लादेश के लिए बल्कि पड़ोसी देशों के लिए भी चिंताजनक हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी बांग्लादेश में हो रहे घटनाक्रम को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कदम उठाने की जरूरत है। भारत जैसे पड़ोसी देश की भूमिका इसमें अहम हो सकती है। धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बांग्लादेश में शांति स्थापित करना प्राथमिकता होनी चाहिए। स्रोत The Independent: बांग्लादेश के सत्ता परिवर्तन और अल्पसंख्यकों पर हमले। Hindustan Times: बांग्लादेश के हालात और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं।

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