बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका पर फैसला टला: सुप्रीम कोर्ट ने दी चार हफ्ते की मोहलत


के कुमार आहूजा  2024-11-27 06:24:02



बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका पर फैसला टला: सुप्रीम कोर्ट ने दी चार हफ्ते की मोहलत

29 सालों से जेल में बंद राजोआना की याचिका पर संवेदनशील मामला

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका पर केंद्र सरकार ने "संवेदनशीलता" का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से और समय मांगा। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए सरकार को चार और हफ्तों का समय दिया है।

क्या है मामला?

बलवंत सिंह राजोआना, जो प्रतिबंधित संगठन बब्बर खालसा से जुड़े थे, को 1995 में चंडीगढ़ सचिवालय के बाहर हुए बम धमाके में शामिल होने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। इस धमाके में मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और 16 अन्य लोगों की मौत हुई थी। उन्हें 2007 में दोषी ठहराया गया था। राजोआना पिछले 29 वर्षों से जेल में बंद हैं और 2012 से उनकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है।

केंद्र सरकार का पक्ष

सुप्रीम कोर्ट के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह मामला अत्यधिक संवेदनशील है और इसमें सुरक्षा एजेंसियों की सलाह आवश्यक है। मेहता ने अदालत को बताया कि फाइल गृह मंत्रालय में लंबित है और राष्ट्रपति के पास अभी तक नहीं भेजी गई। इसके कारण अदालत ने अपने पिछले आदेश को लागू नहीं किया, जिसमें राष्ट्रपति को दो हफ्तों में याचिका पर निर्णय लेने को कहा गया था।

राजोआना की दलील

राजोआना के वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत में कहा कि याचिका के लंबित रहने से उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि 12 साल से अधिक समय तक दया याचिका पर निर्णय न लेना अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। राजोआना ने अपनी सजा माफ करने की मांग करते हुए अदालत में अंतरिम राहत की याचिका दायर की थी, जिसे पहले खारिज कर दिया गया था।

केंद्र का रुख और खालिस्तान मुद्दा

सरकार का मानना है कि राजोआना की रिहाई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। खालिस्तान समर्थक भावनाओं की पुनरुत्थान की संभावना को देखते हुए, केंद्र इस मामले को लेकर सतर्क है।

बेअंत सिंह हत्याकांड: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

31 अगस्त 1995 को हुए बम धमाके में बेअंत सिंह की हत्या हुई थी। इस घटना ने पंजाब में हिंसा और आतंकवाद के काले अध्याय को उजागर किया। राजोआना और उनके साथी जगतार सिंह हवारा समेत कई लोगों को इस मामले में दोषी ठहराया गया।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को चार हफ्ते बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। अदालत ने कहा कि यदि केंद्र तय समय में निर्णय नहीं लेता, तो वह याचिका पर अंतरिम राहत पर विचार करेगा।


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