अलवर में तीन दिवसीय मत्स्य उत्सव में संस्कृति और रंग-बिरंगे कार्यक्रमों का जलवा ♦ पर्यटकों ने कहा – अलवर का उत्सव सबसे अलग
के कुमार आहूजा 2024-11-26 16:54:23

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अलवर जिले में इस साल का मत्स्य उत्सव विशेष रूप से चर्चा में है, जहां तीन दिनों तक आयोजित सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों ने पर्यटकों का दिल जीत लिया। भानगढ़ के ऐतिहासिक स्थल से शुरू हुआ यह उत्सव शहर भर में उल्लास और आनंद का कारण बना। जानिए इस उत्सव की पूरी कहानी, जिसमें लोक कला, संगीत, और विशेष धार्मिक आयोजन शामिल थे।
मत्स्य उत्सव की शुरुआत:
अलवर जिले में 25 नवंबर से 27 नवंबर तक मनाए जा रहे तीन दिवसीय मत्स्य उत्सव का उद्घाटन सोमवार को भानगढ़ से हुआ। इस उत्सव का उद्देश्य न केवल मत्स्य पालन को बढ़ावा देना था, बल्कि राजस्थान की समृद्ध संस्कृति को भी प्रस्तुत करना था। भानगढ़ में आयोजित पहले दिन के कार्यक्रम में लोक कलाकारों ने अपने नृत्य और संगीत के प्रदर्शन से दर्शकों का दिल जीता। इसके बाद दोपहर में सिलीसेढ़ झील की पाल पर रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जो पर्यटकों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया।
51 दीपों से महाआरती का आयोजन:
सोमवार शाम करीब 6:45 बजे अलवर शहर स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में 51 दीपों से महाआरती का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। एडीएम सेकंड योगेश डागुर, नगर निगम आयुक्त जितेंद्र सिंह नरुका और पर्यटन विभाग की सहायक निदेशक टीना यादव ने इस धार्मिक आयोजन में भाग लिया और उसे सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।
लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां:
महाआरती के बाद महल चौक पर 'बेस्ट ऑफ राजस्थान' सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए लोक कलाकारों ने नृत्य और गायन की शानदार प्रस्तुतियां दी। इस दौरान स्थानीय दर्शकों ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के दौरान एक और खास बात यह रही कि स्काउट गाइड के सदस्य भी मौजूद रहे, जिन्होंने आयोजन को और भी भव्य बना दिया।
पर्यटकों का उत्सव में उत्साह:
इस बार के मत्स्य उत्सव में देशभर से पर्यटक पहुंचे, जिनमें खास तौर पर गुरुग्राम से आई इंदु और सुधीर कुमार शामिल थे। इंदु ने बताया कि वह इस उत्सव के बारे में पहले से सुन चुकी थीं और इस बार उन्होंने इसे खास तौर पर देखने का निर्णय लिया था। उनका कहना था कि यह उत्सव राजस्थान के अन्य मेलों से बिल्कुल अलग था, और इसे अनुभव करना उनके लिए अद्वितीय अनुभव रहा। सुधीर कुमार ने भी इस उत्सव के लिए अलवर आने का फैसला किया था और उन्होंने कहा कि वह हर साल इस आयोजन में शामिल होना चाहेंगे।
आने वाले दिनों के कार्यक्रम:
अलवर के मत्स्य उत्सव का सिलसिला अगले दो दिनों तक जारी रहेगा, जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक, धार्मिक और मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह उत्सव न केवल स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देता है, बल्कि पर्यटन को भी प्रोत्साहित करता है। आयोजकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में इस उत्सव को और भी बड़ा और भव्य बनाने का प्रयास किया जाएगा।
अलवर का मत्स्य उत्सव इस बार अपनी विविधता और भव्यता के कारण अलग ही छाप छोड़ रहा है। अगर आप भी राजस्थान की संस्कृति और समृद्ध विरासत को अनुभव करना चाहते हैं, तो इस उत्सव को देखना न भूलें।