बंबई उच्च न्यायालय में अभद्र व्यवहार: अदालत के कर्मचारी से दुर्व्यवहार पर कड़ी चेतावनी


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2024-11-26 05:01:41



 

बंबई उच्च न्यायालय में हाल ही में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने न्यायपालिका की गरिमा और अदालत परिसर के अनुशासन को लेकर अहम सवाल खड़े किए। घटना ने न केवल न्यायालय की सख्ती को दर्शाया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि अदालत में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

घटना का विवरण

14 नवंबर को बंबई उच्च न्यायालय के जज जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खटटा ने एक घटना का स्वतः संज्ञान लिया, जिसमें नासिक नगर निगम (NMC) के उप आयुक्त मयूर पाटिल और अधिवक्ता दिनेश कदम ने अदालत के कर्मचारी अतुल तायडे से अभद्र भाषा में बात की। इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब तायडे ने उन्हें अदालत के गलियारे में शांति बनाए रखने का निर्देश दिया।

तायडे के अनुसार, पाटिल और कदम ने न केवल उन्हें गाली दी बल्कि धमकी दी कि उनकी नौकरी समाप्त कर दी जाएगी। जजों ने इस घटना को "न्यायालय की मर्यादा का उल्लंघन" बताते हुए इसे गंभीरता से लिया।

अदालत का रुख और कार्रवाई

जजों ने घटना के बाद तायडे को पाटिल और कदम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) के प्रावधानों के तहत शिकायत दर्ज करने की सलाह दी। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस प्रकार का आचरण न्यायपालिका की गरिमा और अनुशासन के लिए हानिकारक है।

हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ता राम आप्टे और अधिवक्ता सुभाष झा ने हस्तक्षेप करते हुए कदम के पेशेवर जीवन को बचाने के लिए अदालत से कठोर कार्रवाई से बचने का अनुरोध किया।

माफी और अदालत की चेतावनी

पाटिल और कदम दोनों ने अदालत और तायडे से बिना शर्त माफी मांगी। जजों ने उनकी माफी स्वीकार कर ली, लेकिन साथ ही उन्हें भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने की सख्त चेतावनी दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की गतिविधियों को दोहराए जाने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

न्यायपालिका के प्रति सम्मान की आवश्यकता

जजों ने घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अदालत परिसर में अनुशासन बनाए रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के कार्य में बाधा डालने वाली घटनाएं न केवल व्यक्तिगत प्रतिष्ठा पर असर डालती हैं बल्कि कानून के शासन को भी कमजोर करती हैं।

इस घटना से एक स्पष्ट संदेश गया है कि न्यायालय की गरिमा और अनुशासन के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। न्यायपालिका ने अपने आदेश के माध्यम से यह सुनिश्चित किया कि अदालत का माहौल शांतिपूर्ण और अनुशासित बना रहे।


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