(अब खबर न्यायालय से) चित्तौड़गढ़ पॉक्सो कोर्ट का चौंकाने वाला फैसला: आरोपी बरी, डॉक्टर के विरुद्ध जांच के आदेश 


के कुमार आहूजा  2024-11-26 04:27:57



 

चित्तौड़गढ़ की पॉक्सो कोर्ट संख्या 2 ने हाल ही में एक गंभीर मामले में अपना फैसला सुनाते हुए नाबालिग पीड़िता के मेडिकल रिपोर्ट में खामियों की वजह से आरोपी मोहनलाल मोगिया को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने मामले में मेडिकल रिपोर्ट बनाने वाले डॉक्टर डॉ. राजीव मंगल पर गंभीर टिप्पणियां कीं और विभागीय जांच के आदेश दिए।

क्या था मामला?

यह मामला बड़ी सादड़ी थाना क्षेत्र का है, जहां जुलाई 2020 में नाबालिग के साथ दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर पॉक्सो एक्ट और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। सुनवाई के दौरान, बचाव पक्ष ने मेडिकल रिपोर्ट में हुई चूक और प्रक्रिया के उल्लंघन को उजागर किया।

मेडिकल रिपोर्ट की खामियां: कैसे उजागर हुआ सच?

डॉ. राजीव मंगल ने मेडिकल परीक्षण के आधार पर राय दी, लेकिन यह राय एक्स-रे रिपोर्ट से पहले ही दे दी गई। एक्स-रे रिपोर्ट, जो आयु निर्धारण के लिए अहम थी, मेडिकल राय के दो दिन बाद तैयार की गई। इसके अलावा, पीड़िता की जांच के दौरान मां, महिला पुलिसकर्मी, या नर्स की गैर-मौजूदगी भी गंभीर चूक थी।

अदालत की टिप्पणी और आदेश

पीठासीन अधिकारी अमित सहलोत ने इसे कर्तव्य की गंभीर लापरवाही करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की गलतियां न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करती हैं। कोर्ट ने चिकित्सा विभाग को निर्देश दिया कि डॉ. मंगल के खिलाफ जांच कर उचित कार्रवाई की जाए।

पॉक्सो मामलों में मेडिकल जांच की भूमिका

यह मामला पॉक्सो एक्ट के तहत मामलों में मेडिकल रिपोर्ट की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी ऐसे मामलों में मेडिकल जांच की प्रक्रिया को सख्त करने के निर्देश दिए थे, ताकि पीड़िता की उम्र का सही निर्धारण किया जा सके और कोई भी दोषी बच न सके​।

महत्वपूर्ण निष्कर्ष

इस घटना ने न्यायिक प्रक्रिया में सटीक मेडिकल जांच और रिपोर्ट की अनिवार्यता को एक बार फिर उजागर किया है। मेडिकल खामियों की वजह से एक गंभीर अपराध में आरोपी को संदेह का लाभ मिला, जो न्यायिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।


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