(अब हमारे सम्माननीय जज के एहम  फैसला )इंदौर पुलिस पर हाई कोर्ट का कड़ा रुख: आदेशों की अनदेखी पर की गई कार्रवाई


के कुमार आहूजा कान्ता आहूजा  2024-11-25 21:27:50



 

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर बेंच ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है, जिन पर कोर्ट के आदेशों की जानबूझकर अनदेखी करने का आरोप है। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस कमिश्नर से जांच का जिम्मा उप पुलिस आयुक्त (DCP) से ऊपर के अधिकारियों को सौंपने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस द्वारा आरोपी के खिलाफ सही कार्रवाई न करने और बार-बार कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

न्यायालय का चिंताजनक अवलोकन

इस मामले में उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि आरोपी के खिलाफ अग्रिम जमानत खारिज होने के बावजूद पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने की कोई कोशिश नहीं की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी विशेष अनुमति याचिका खारिज की थी, फिर भी आरोपी को गिरफ्तार करने के बजाय, पुलिस ने 41A सीआरपीसी के तहत एक नोटिस जारी किया, जो अदालत द्वारा दिए गए आदेशों की खुले तौर पर अवहेलना थी। न्यायमूर्ति अभ्यंकर ने इसे "पैरेलल कोर्ट" चलाने की सूरत में देखा और इसे अब और सहन नहीं किया जा सकता है।

वकील का पक्ष और पुलिस की भूमिका पर सवाल

पेटीशनर के वकील ने अदालत में कहा कि उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेशों के बावजूद पुलिस अधिकारियों ने आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसके परिणामस्वरूप यह साफ होता है कि पुलिस ने जानबूझकर आरोपी को बचाने की कोशिश की और जांच में पक्षपाती रवैया अपनाया। कोर्ट ने इस पर सख्त प्रतिक्रिया दी और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इसे किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने की मांग की।

आदेशों का उल्लंघन: पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सजा की संभावना

कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि आरोपी की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज होने के बाद पुलिस ने जानबूझकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई में देरी की, जिससे यह साबित होता है कि पुलिस ने कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया। न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए, इंदौर पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि मामले की जांच किसी उच्च रैंक के अधिकारी से करवाई जाए और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

उच्च न्यायालय की न्यायिक सक्रियता

इस प्रकरण में न्यायालय ने जो रुख अपनाया, वह न्यायपालिका की सक्रियता और अदालत के आदेशों के प्रति सम्मान की आवश्यकता को रेखांकित करता है। इसके अलावा, इसने यह भी साफ किया कि पुलिस अधिकारियों की लापरवाही और गलत तरीके से की गई कार्रवाई पर कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले के मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है और यह निर्देश केवल प्रक्रिया के पालन के लिए था।


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