सरकार से अंतरिक्ष क्षेत्र को इंफ्रास्ट्रक्चर सूची में शामिल करने की मांग: IIFCL का बड़ा कदम


के कुमार आहूजा  2024-11-25 16:38:35



 

भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (IIFCL) ने सरकार से अंतरिक्ष क्षेत्र को "समरस सूची" (Harmonized List) में शामिल करने का अनुरोध किया है। यह कदम अंतरिक्ष मिशनों के लिए वित्तीय सहायता को सरल बनाने और सैटेलाइट वाहन निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

IIFCL की भूमिका और ISRO के साथ सहयोग

IIFCL की सहायक कंपनी, IIFCL प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (IPL), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को परामर्श सेवाएं प्रदान कर रही है। इसके तहत कई उपग्रहों का ट्रांसफर ISRO की वाणिज्यिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) को किया जा चुका है। NSIL ने हाल ही में 75 तकनीकी हस्तांतरण समझौतों (Technology Transfer Agreements) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो भारतीय निजी कंपनियों को अत्याधुनिक अंतरिक्ष तकनीकों का उपयोग करने में सक्षम बना रहे हैं​।

FDI में छूट और अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश

सरकार ने हाल ही में अंतरिक्ष क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी है। इस निर्णय का उद्देश्य निजी क्षेत्र की भागीदारी और तकनीकी उन्नति को बढ़ावा देना है। इससे न केवल भारत की आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा, बल्कि भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी अपना दबदबा बना सकेगा​।

अंतरिक्ष क्षेत्र को इंफ्रास्ट्रक्चर सूची में शामिल करने का महत्व

यदि अंतरिक्ष क्षेत्र को समरस इंफ्रास्ट्रक्चर सूची में शामिल किया जाता है, तो इससे न केवल वित्तीय संस्थानों द्वारा सस्ते ऋण उपलब्ध होंगे, बल्कि नए अंतरिक्ष प्रोजेक्ट्स को आर्थिक मजबूती भी मिलेगी। सैटेलाइट निर्माण और अंतरिक्ष यानों के विकास के लिए यह पहल भारत को वैश्विक स्तर पर एक अग्रणी खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकती है​।

NSIL और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी

NSIL ने फ्रांसीसी कंपनी एरियनस्पेस के साथ एक दीर्घकालिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य वाणिज्यिक उपग्रह लॉन्च सेवाओं के लिए बढ़ते वैश्विक बाजार का दोहन करना है। इसके तहत भारत के भारी-भरकम LVM3 रॉकेट और एरियनस्पेस के Ariane-6 रॉकेट का उपयोग किया जाएगा​।

भारत के लिए नई संभावनाओं का द्वार

IIFCL की यह पहल और सरकार की ओर से अंतरिक्ष क्षेत्र को प्रोत्साहित करने वाले निर्णय भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम साबित होंगे। इन प्रयासों से देश की तकनीकी क्षमता के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।


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