राजस्थान हाईकोर्ट: कोर्ट फीस विवाद में महत्वपूर्ण फैसला, जानिए क्या कहा अदालत ने
राजस्थान हाईकोर्ट: कोर्ट फीस विवाद में महत्वपूर्ण फैसला, जानिए क्या कहा अदालत ने 2024-11-24 05:35:49

जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया कि मुकदमे का मूल्यांकन संपत्ति के बाजार मूल्य के आधार पर नहीं, बल्कि दावा की प्रकृति और उसके मूल्यांकन के अनुसार किया जाएगा। यह फैसला न्यायमूर्ति रेखा बोराना द्वारा एक संपत्ति बिक्री विवाद से संबंधित मामले में सुनाया गया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 15.875 बीघा जमीन की बिक्री से जुड़ा था। इस संपत्ति की कुल कीमत लगभग 5.5 करोड़ रुपये तय की गई थी, जिसके तहत 22 भूखंडों की बिक्री के लिए दस्तावेज़ पहले ही निष्पादित किए जा चुके थे। विवाद केवल 8 भूखंडों को लेकर था, जिनकी कीमत 23 लाख रुपये आंकी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने 8 भूखंडों के लिए विशेष प्रदर्शन (Specific Performance) का दावा किया और कोर्ट फीस 23 लाख रुपये के आधार पर जमा की।
उत्तरदाताओं का तर्क
उत्तरदाताओं ने तर्क दिया कि पूरा अनुबंध 5.5 करोड़ रुपये का था और कोर्ट फीस उसी आधार पर देय होनी चाहिए थी। उन्होंने इसे चुनौती देते हुए ट्रायल कोर्ट में याचिका दायर की, जो खारिज कर दी गई। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को मुकदमे का पुनर्मूल्यांकन करने और कोर्ट फीस में अंतर जमा करने का निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय का निर्णय
राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मुकदमे का मूल्यांकन केवल उस राहत के आधार पर होना चाहिए, जो याचिकाकर्ता ने मांगी है। कोर्ट ने कहा, "मुकदमे का मूल्यांकन दावे की प्रकृति के आधार पर किया जाता है, न कि संपत्ति के बाजार मूल्य के आधार पर।"
महत्वपूर्ण निष्कर्ष
न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले Bharat Bhushan Gupta v. Pratap Narain Verma का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी मुकदमे का मूल्यांकन केवल मांगी गई राहत के आधार पर किया जाना चाहिए। चूंकि विवाद केवल 8 भूखंडों पर था और उनके लिए अनुबंध का मूल्य 23 लाख रुपये था, इसलिए याचिकाकर्ताओं द्वारा जमा की गई कोर्ट फीस कानून के अनुसार पर्याप्त थी।
फैसले का प्रभाव
यह फैसला अदालतों में लंबित संपत्ति विवादों और कोर्ट फीस से जुड़े मामलों में एक मिसाल स्थापित करता है। हाईकोर्ट का यह दृष्टिकोण कानून के उस प्रावधान को सुदृढ़ करता है, जिसमें दावे की प्रकृति मुकदमे के मूल्यांकन का मुख्य आधार होती है।