कैदी को ई-मुलाकात की सुविधा: हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला


के कुमार आहूजा  2024-10-04 07:41:24



कैदी को ई-मुलाकात की सुविधा: हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में तिहाड़ जेल के अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे कैदी मासासोंग एओ को ई-मुलाकात की सुविधा प्रदान करें। मासासोंग एओ, जो कि एक कथित आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामले में 2020 से हिरासत में हैं, ने इस सुविधा के लिए अदालत का रुख किया था। अदालत ने यह आदेश तब दिया जब यह स्पष्ट हो गया कि एओ को अपनी बातचीत रिकॉर्ड किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है।

घटनाक्रम: अदालत का आदेश और आरोपी का पक्ष

दिल्ली हाई कोर्ट ने तिहाड़ जेल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे कैदी मासासोंग एओ को ई-मुलाकात की सुविधा प्रदान करें, जो एक ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए कैदियों को बाहरी दुनिया से संपर्क करने की अनुमति देता है। एओ, जो राष्ट्रीय समाजवादी परिषद नगालैंड-इसाक मुइवा (NSCN-IM) के कथित नेता हैं और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा 2020 में आरोपित किए गए थे, ने फोन और मुलाकात की सुविधाओं से वंचित किए जाने के बाद अदालत में अपील की थी।

न्यायमूर्ति संजीव नरूला की अध्यक्षता में, अदालत ने यह भी कहा कि एओ द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर, उनकी बातचीत रिकॉर्ड की जा सकती है और यदि आवश्यकता हो तो उसे संरक्षित किया जा सकता है। यह आदेश 1 अक्टूबर, 2024 को जारी किया गया था, और अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि तिहाड़ जेल प्रशासन तकनीकी बुनियादी ढांचा स्थापित करे ताकि यह ई-मुलाकात सुविधा संभव हो सके।

याचिका का आधार और वकीलों की दलीलें

मसासोंग एओ के वकील एम. एस. खान ने अदालत में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को अन्य कैदियों की तरह फोन और मुलाकात की सुविधाएं दी जानी चाहिए, क्योंकि यह उनके अधिकारों का हनन है। खान ने बताया कि NIA ने 12 जून, 2024 को एक पत्र के ज़रिए तिहाड़ जेल प्रशासन से अनुरोध किया था कि एओ को इन सुविधाओं से वंचित किया जाए, क्योंकि वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं और सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं।

NIA के वकील शिल्पा सिंह ने कहा कि एजेंसी मामले की जांच कर रही है और जल्द ही इस पर अपना रुख स्पष्ट करेगी।

कोर्ट का निर्णय

अदालत ने कहा कि कैदी के पास उपलब्ध फोन नंबरों की पुष्टि हो गई है, और चूंकि उन्हें अपनी बातचीत रिकॉर्ड किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है, इसलिए उन्हें ई-मुलाकात की सुविधा दी जानी चाहिए। हाई कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि दिल्ली सरकार ई-मुलाकात के लिए आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाएं करे।

आगे की सुनवाई और प्रगति

यह मामला अब 7 नवंबर, 2024 को फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है, जब अदालत यह सुनिश्चित करेगी कि आदेश का पालन हो रहा है या नहीं। इस बीच, तिहाड़ जेल प्रशासन को दो सप्ताह के भीतर आवश्यक बुनियादी ढांचे की स्थापना करने का निर्देश दिया गया है।

यह आदेश तिहाड़ जेल में कैदियों के अधिकारों और सुरक्षा के बीच एक संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। एक ओर, कैदियों के अधिकारों की रक्षा की जा रही है, जबकि दूसरी ओर, सुरक्षा एजेंसियों को भी यह अधिकार दिया गया है कि वे बातचीत की निगरानी कर सकें, ताकि किसी भी प्रकार की गैरकानूनी गतिविधि को रोका जा सके।

Source : ANI


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